मुआवजे की प्रक्रिया शुरू, नियमों के उल्लंघन पर 5 दावे निरस्त
अलीगढ़। जिले में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 में नसबंदी कराए जाने के बावजूद 64 महिलाएं दोबारा गर्भवती हो गईं। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और मामले की विभागीय समीक्षा शुरू कर दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नसबंदी के बाद गर्भधारण के इन मामलों को शासन स्तर पर गंभीरता से लिया गया है। नियमों के तहत पीड़ित महिलाओं को मुआवजा देने की व्यवस्था है, जिसके लिए विभाग ने 64 में से अधिकांश मामलों में मुआवजा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
5 महिलाओं के दावे खारिज
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच के दौरान 5 महिलाओं के मुआवजा दावे नियमों के उल्लंघन के कारण निरस्त कर दिए गए हैं। बताया गया कि इन मामलों में निर्धारित शर्तों और प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
विभागीय जांच के संकेत
सूत्रों के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर नसबंदी विफल होने से ऑपरेशन की गुणवत्ता, चिकित्सकीय प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और जिम्मेदार अधिकारियों व चिकित्सकों की भूमिका क्या रही।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार नियोजन कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि नसबंदी जैसे संवेदनशील मामलों में छोटी सी चूक भी महिलाओं और परिवारों के जीवन पर बड़ा असर डालती है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे शासन को भेजा जाएगा। दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित महिलाओं को समयबद्ध मुआवजा दिए जाने की मांग भी तेज़ हो गई है।

