लेखक- अज़हर उमरी
( वरिष्ठ पत्रकार एवं सामजिक चिंतक )
हिन्दुस्तान की पहचान उसकी विविधता, आध्यात्मिक परंपराओं और साझा संस्कृति से है। यहाँ एक ओर सूफ़ी संतों की दरगाहें हैं, तो दूसरी ओर रंगों का त्योहार होली। जब ये दोनों परंपराएँ एक साथ दिखाई देती हैं, तो वह नज़ारा केवल उत्सव नहीं, बल्कि भाईचारे और इंसानियत का जीवंत संदेश बन जाता है।
दरगाहों की रूहानी फिज़ा
देश की मशहूर दरगाहों—जैसे दरगाह ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया और दरगाह हाजी अली—में हर धर्म और समुदाय के लोग हाज़िरी देते हैं। सूफ़ी संतों ने हमेशा मोहब्बत, सेवा और इंसानियत का पैग़ाम दिया। दरगाहों की चौखट पर कोई ऊँच-नीच नहीं, कोई भेदभाव नहीं—सिर्फ़ दुआ, दया और दिलों का मेल।
सूफ़ी परंपरा में बसंत और रंगों का विशेष महत्व रहा है। इतिहास गवाह है कि अमीर ख़ुसरो ने अपने उस्ताद हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया को खुश करने के लिए बसंती रंगों और गीतों की परंपरा को बढ़ावा दिया। आज भी कई दरगाहों में बसंत और होली के अवसर पर कव्वालियाँ गूँजती हैं—“आज रंग है री…” जैसे कलाम वातावरण को आध्यात्मिक रंगों से भर देते हैं।
होली: रंगों में रचा-बसा अपनापन
होली केवल एक हिन्दू त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप का पर्व है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि मन के मैल को धोकर रिश्तों में नए रंग भरो। जब दरगाहों में गुलाल की हल्की बौछार के साथ दुआएँ दी जाती हैं, तो वह दृश्य गंगा-जमुनी तहज़ीब की अनोखी तस्वीर पेश करता है।
अजमेर शरीफ़ में होली के दिनों में कई लोग दरगाह पर चादर चढ़ाकर देश में अमन-चैन की दुआ करते हैं। दिल्ली की निज़ामुद्दीन दरगाह में सूफ़ियाना कलाम और रंगों की रौनक एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव कराती है। यह परंपरा बताती है कि भारतीय संस्कृति में धर्म से ऊपर इंसानियत की डोर मजबूत रही है।
साझा विरासत का संदेश
आज जब समाज में विभाजन की बातें होती हैं, तब दरगाहों पर मनाई जाने वाली होली हमें याद दिलाती है कि यह देश संतों, फ़क़ीरों और ऋषियों की धरती है। यहाँ त्योहार दीवारें नहीं, पुल बनाते हैं।
दरगाह और होली का संगम हमें यही सिखाता है—
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा।
यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है कि विविधता में एकता ही हिन्दुस्तान की असली ताक़त है। जब दरगाह की चौखट पर रंग बिखरते हैं, तो वे केवल गुलाल नहीं होते—वे मोहब्बत, अमन और भाईचारे के रंग होते हैं।

