हैदराबाद, । बदलते वैश्विक परिदृश्य में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी को लेकर “मकतब सिदरतुल मुन्तहा” और “मकतब ताजुल कुरआन” के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। इस संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वानों, उलेमा, शिक्षाविदों और सामाजिक चिंतकों ने भाग लेते हुए शांति, संयम और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।
“जंग नहीं, बातचीत ही रास्ता”
बैठक में वक्ताओं ने साफ कहा कि मौजूदा हालात में युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। ईरान-अमेरिका तनाव को वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए सभी पक्षों से धैर्य, समझदारी और बातचीत के रास्ते पर चलने की अपील की गई।
अमेरिका से मौलाना डॉ. सैयद शाह समीयुल्लाह हुसैनी चिश्ती कादरी ने कहा कि यह विवाद भले ही राजनीतिक हो, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। ऐसे में इंसाफ, मानवता और संतुलन को प्राथमिकता देना समय की मांग है।
भारत जैसे देशों की अहम भूमिका
शांति दूत एम.ए. नजीब ने कहा कि भारत सहित वे देश, जिनकी विदेश नीति संतुलित और संवाद आधारित है, इस तरह के तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जरूरी बताया।
“तालीम ही सबसे बड़ा हथियार”
अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद वाहिद अली खान ने कहा कि आज के दौर में शिक्षा, जागरूकता और एकता ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने जोर दिया कि भावनाओं के बजाय विवेक और रणनीति से काम लेना चाहिए।
भावनात्मक नहीं, कूटनीतिक प्रतिक्रिया जरूरी
वरिष्ठ पत्रकार अज़हर उमरी ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते हालात पर काबू नहीं पाया गया तो यह तनाव बड़े संकट में बदल सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम और संवाद को प्राथमिकता देने की अपील की।
ईरान की रणनीति और क्षेत्रीय प्रभाव
मौलाना बासित अली ने कहा कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान ने अपनी रक्षा नीति को मजबूत किया है और आज वह क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरा है। मिसाइल और ड्रोन तकनीक में उसकी प्रगति इसे अलग पहचान देती है।
युवाओं की भूमिका और संयम का संदेश
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल हमीद मनन ने कहा कि युवाओं में जो जज़्बा और एकजुटता है, वह सराहनीय है, लेकिन हर परिस्थिति में समझदारी और दूरदर्शिता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
इस्लाम का संदेश: अमन और इंसाफ
डॉ. सैयद हबीब इमाम कादरी ने कहा कि क़ुरआन हमें शांति, सहिष्णुता और न्याय का रास्ता दिखाता है। उन्होंने कहा कि इन्हीं मूल्यों को अपनाकर दुनिया में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है।
बैठक का सार यही रहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में जंग नहीं, बल्कि संवाद, धैर्य और कूटनीति ही समाधान है। यदि सभी पक्ष समझदारी से आगे बढ़ें तो न केवल तनाव कम होगा, बल्कि एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण भविष्य भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

