आगरा। ईद-उल-अज़हा नज़दीक आते ही आगरा की बकरा मंडियों में रौनक बढ़ गई है, लेकिन इस बार कुर्बानी के बकरों की कीमतों ने आम लोगों की जेब पर भारी असर डालना शुरू कर दिया है। शहर की शाहगंज, सदर, ट्रांस यमुना, फतेहाबाद रोड और देहाती क्षेत्रों की मंडियों में बकरों के दाम पिछले साल की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
जहां वर्ष 2025 में मध्यम आकार का बकरा 12 से 15 हजार रुपये में आसानी से मिल जाता था, वहीं इस बार उसी श्रेणी का बकरा 18 से 25 हजार रुपये तक बिक रहा है। बड़े और आकर्षक नस्ल के बकरों की कीमतें 40 हजार से शुरू होकर एक लाख रुपये तक पहुंच रही हैं।
बकरा व्यापारियों का कहना है कि इस बार महंगाई ने पशु बाजार की कमर तोड़ दी है। पशुओं के चारे, भूसे और दाने की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट खर्च भी काफी बढ़ गया है, जिसका सीधा असर बकरों की कीमतों पर पड़ा है।

व्यापारियों के अनुसार राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में बकरे आगरा लाए जाते हैं। लंबी दूरी के परिवहन, पशुओं की देखभाल और गर्मी के कारण होने वाले अतिरिक्त खर्च ने बाजार को महंगा बना दिया है। भीषण गर्मी के चलते पशुपालकों को दवाइयों और विशेष देखभाल पर भी अधिक खर्च करना पड़ रहा है।

खरीदारों का कहना है कि हर साल की तुलना में इस बार कुर्बानी काफी महंगी पड़ रही है। कई परिवार अब बजट के अनुसार छोटे बकरे तलाश रहे हैं, जबकि युवा वर्ग में भारी-भरकम और आकर्षक नस्लों के बकरों का क्रेज बना हुआ है। सोशल मीडिया पर चर्चित नस्लों की मांग बढ़ने से भी कीमतों में तेजी आई है।
इसके बावजूद मंडियों में खरीदारों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। शाम ढलते ही बकरा बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है और व्यापारियों को उम्मीद है कि बकरीद से ठीक पहले दामों में और तेजी आ सकती है।

स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में भी लोग धार्मिक परंपरा और उत्साह के साथ कुर्बानी की तैयारी में जुटे हुए हैं, लेकिन बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्गीय परिवारों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

