100 दिवसीय अभियान से आगरा ने हासिल की ऐतिहासिक 101% उपलब्धि
98% उपचार सफलता दर के साथ जनपद बना मिसाल
आगरा। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत 24 मार्च से संचालित हो रहे ‘100 दिवसीय विशेष टीबी खोज अभियान’ में आगरा ने राष्ट्रीय लक्ष्य को पार करते हुए 101 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है।
वहीं दूसरी ओर जनवरी 2026 से अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 12,361 टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें तत्काल उपचार से जोड़ने में सफलता प्राप्त की है साथ ही जनवरी से मई 2026 के दौरान आगरा में 98 प्रतिशित ट्रीटमेंट सक्सेस रेट रहा है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि मरीजों की केवल पहचान ही नहीं की जा रही, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक पूर्ण उपचार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग की मजबूत रणनीति, फील्ड स्तर पर कार्यरत टीमों की सतत मेहनत तथा बढ़ती जन-जागरूकता का परिणाम मानी जा रही है।
अभियान के तहत खामोश बीमारी की हो रही पहचान
100 दिवसीय विशेष टीबी खोज अभियान के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों तक भी जांच सेवाएं पहुंच रही हैं, जिनमें टीबी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने से उपचार शीघ्र शुरू किया जा रहा है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं और संक्रमण के प्रसार की संभावना को कम करने में मदद मिल रही है।
अभियान के अंतर्गत अब तक 81,151 संदिग्ध व्यक्तियों का डिजिटल एक्स-रे कराया गया। इनमें टीबी के संकेत मिलने पर 20,440 लोगों की सीबी-नाट (CB-NAAT) जांच की गई, जिसमें 5,385 नए टीबी मरीजों की पुष्टि हुई। इनमें 944 ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह अभियान विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है क्योंकि इसके माध्यम से ऐसे “साइलेंट टीबी मरीजों” की पहचान संभव हुई है, जिन्हें स्वयं भी अपने संक्रमित होने की जानकारी नहीं थी।
संवेदनशील क्षेत्रों में लगाए विशेष स्वास्थ्य शिविर
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता के अनुसार, केंद्रीय टीबी डिविजन द्वारा चिन्हित संवेदनशील एवं उच्च जोखिम वाले गांवों में कुल 239 विशेष स्वास्थ्य शिविर प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें से अब तक 197 शिविर सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों में निःशुल्क जांच, डिजिटल एक्स-रे, सैंपल परीक्षण तथा तत्काल उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। डीटीओ ने बताया कि वर्तमान में जनपद में लगभग 10,944 टीबी मरीज उपचाराधीन हैं, जिन्हें नियमित दवा के साथ निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत पोषण एवं वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है।
जांच और उपचार का मजबूत नेटवर्क
टीबी की शीघ्र पहचान एवं मुफ्त उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जनपद में व्यापक नेटवर्क विकसित किया है। इसके अंतर्गत जनपद में 52 बलगम जांच केंद्र सक्रिय रूप से संचालित किए जा रहे हैं। 860 डॉट्स सेंटरों के माध्यम से मरीजों को घर के निकट दवा उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकांश क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता डॉट्स प्रोवाइडर के रूप में मरीजों की नियमित निगरानी एवं दवा सेवन सुनिश्चित कर रही हैं।
इसके अतिरिक्त, संक्रमण को फैलने से रोकने के उद्देश्य से टीबी मरीजों के परिवार एवं निकट संपर्क में रहने वाले लोगों में से 95 प्रतिशत को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) उपलब्ध कराया जा चुका है।
जनता से अपील— “संकोच छोड़ें, जांच कराएं”
डॉ. सुखेश गुप्ता ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि टीबी प्रारंभिक अवस्था में बिना गंभीर लक्षणों के भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लगातार खांसी, वजन कम होना, बुखार, कमजोरी या किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा स्वास्थ्य शिविर में निःशुल्क जांच अवश्य कराएं। उन्होंने कहा—“जागरूकता, समय पर जांच और पूरा उपचार ही टीबी से बचाव तथा टीबी मुक्त समाज निर्माण की सबसे मजबूत कुंजी है।”
टीला निवासी 19 वर्षीय झलक (बदला हुआ नाम) बताती हैं, “करीब एक साल से मुझे पेट संबंधी समस्याएं हो रही थीं। खाना खाने के बाद पचता नहीं था और पेट में तेज दर्द शुरू हो जाता था। सुबह ठीक से फ्रेश भी नहीं हो पाती थी। कई बार मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा ली, फिर भी समस्या बनी रही। प्राइवेट डॉक्टर की दवा से कुछ दिन आराम मिलता, लेकिन 1-2 दिन बाद दर्द और पाचन की दिक्कत फिर शुरू हो जाती। इसके बाद मेरी बहन मुझे टीबी यूनिट में ले गई। वहां जांच के बाद पता चला कि मुझे पेट की टीबी है, जिसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहते हैं। अब मेरा इलाज चल रहा है और डॉक्टर ने 9 महीने तक नियमित दवा खाने को कहा है। चिकित्सा की सलाह से मैं नियमित दवाई का सेवन कर रही हूं, जिससे मुझे पहले से आराम है। मुझे दवा के साथ-साथ प्रतिमाह पोषण पोटली भी मिल रही है। टीबी का इलाज संभव है और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में होता है। अगर लक्षण दिखें तो जांच के लिए डॉक्टर से मिलें।
हाई-रिस्क समूहों पर विशेष फोकस
स्वास्थ्य विभाग विशेष रूप से उन वर्गों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जहां संक्रमण का खतरा अधिक होता है। इनमें मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग, कुपोषित बच्चे एवं वयस्क, ईंट-भट्ठों और निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिक, मधुमेह रोगी, बुजुर्ग तथा पुराने टीबी मरीजों के संपर्क में रहने वाले लोग शामिल हैं।
डॉ. अरुण श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
“टीबी उन्मूलन शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। 98 प्रतिशत उपचार सफलता दर इस बात का प्रमाण है कि जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था मरीजों के पूर्ण उपचार एवं स्वस्थ भविष्य के प्रति पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।”
मनीष बंसल, जिलाधिकारी आगरा
अभियान की सफलता
12361 मरीजों को चिन्हित कर तुरंत इलाज से जोड़ा गया
81151 लोगों की गई स्क्रीनिंग
5385 में सीबीनाट जांच के जरिए हुई टीबी की पुष्टि
197 विशेष स्वास्थ्य शिविर किए गए आयोजित
52 बलगम निरीक्षण केंद्र बनाए गए जनपद में
860 डॉट्स केंद्रों के जरिए मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही दवा

