लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आयुष शिक्षा व्यवस्था को अधिक शोधोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य सरकार आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की शोध क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष योजना पर काम कर रही है। इसके तहत महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय को ऐसे शिक्षकों के लिए पार्ट टाइम पीएचडी कार्यक्रम विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के कई आयुष महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई संचालित हो रही है, लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षक अभी तक पीएचडी उपाधि से वंचित हैं। इसके कारण संस्थानों में शोध कार्यों के विस्तार और विद्यार्थियों को शोध मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सरकार का मानना है कि यदि शिक्षकों को सेवा के दौरान ही शोध करने का अवसर मिले तो आयुष शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। इसी उद्देश्य से ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है, जिससे शिक्षक अपनी नियमित शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ शोध कार्य भी पूरा कर सकें।
शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से आयुष महाविद्यालयों में अनुसंधान का वातावरण मजबूत होगा। साथ ही आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन एवं नवाचार को भी नई गति मिलेगी।
नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप प्रस्तावित यह कार्यक्रम शिक्षकों की अकादमिक योग्यता बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश के आयुष संस्थानों को शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
— टाइम्स ऑफ ताज ब्यूरो

