आगरा। मस्जिद नहर वाली, सिकंदरा के ख़तीब मौलाना मोहम्मद इक़बाल ने जुमे के ख़ुत्बे में गाज़ा की गंभीर मानवीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हाल ही में गाज़ा में दिया गया एक अत्यंत संक्षिप्त जुमे का ख़ुत्बा पूरी दुनिया की इंसानियत और विशेष रूप से उम्मत-ए-मुस्लिमा के ज़मीर को झकझोर देने वाला है।
उन्होंने कहा कि गाज़ा में एक इमाम ने मिम्बर पर खड़े होकर नमाज़ियों से कहा, “मैं बहुत भूखा हूँ, बोलने की ताकत नहीं है। आप भी बहुत भूखे हैं, सुनने की ताकत नहीं है। आइए, नमाज़ के लिए खड़े हो जाएँ।” मौलाना इक़बाल ने कहा कि यह केवल कुछ शब्द नहीं थे, बल्कि बेबसी, भूख और मजबूरी की ऐसी तस्वीर थी, जो पूरी मानवता के लिए एक बड़ा सवाल बन गई है।
उन्होंने कहा कि गाज़ा में हजारों लोगों की जानें जा चुकी हैं, जिनमें बड़ी संख्या मासूम बच्चों की भी है। अनेक लोग घायल और विस्थापित हुए हैं तथा मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में विश्व समुदाय की संवेदनहीनता अत्यंत दुखद है।
मौलाना मोहम्मद इक़बाल ने कहा कि हर इंसान को गाज़ा के पीड़ितों के लिए दिल से दुआ करनी चाहिए, अपने गुनाहों पर तौबा करनी चाहिए और अल्लाह से रहमत एवं अमन की दुआ मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या हमने कभी तनहाई में फ़िलिस्तीन और गाज़ा के मज़लूमों के लिए सच्चे दिल से दुआ की है।
ख़ुत्बे के अंत में उन्होंने अल्लाह तआला से दुआ की कि वह पूरी दुनिया में अमन-चैन कायम करे, विशेष रूप से गाज़ा के लोगों की हिफाज़त फरमाए, उनकी मुश्किलों को आसान करे और उन्हें जल्द न्याय, शांति एवं राहत नसीब करे। आमीन।

