हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। यह दिवस केवल बढ़ती जनसंख्या पर चिंता व्यक्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह विचार करने का भी समय है कि हम अपनी जनसंख्या को किस प्रकार देश की सबसे बड़ी शक्ति में बदल सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रारंभ किया गया यह दिवस हमें याद दिलाता है कि जनसंख्या का विषय केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और सतत विकास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
आज विश्व की जनसंख्या आठ अरब से अधिक हो चुकी है और भारत विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। यह स्थिति हमारे सामने चुनौती भी है और अवसर भी। यदि देश की युवा आबादी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो यही जनसंख्या भारत को विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वहीं यदि संसाधनों का समुचित प्रबंधन न हो, तो बेरोजगारी, गरीबी, पर्यावरण प्रदूषण, स्वास्थ्य संकट और सामाजिक असमानता जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
जनसंख्या संतुलन का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है, विशेष रूप से महिला शिक्षा। एक शिक्षित महिला न केवल अपने परिवार को बेहतर दिशा देती है, बल्कि वह स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, बालिका शिक्षा और महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण जनसंख्या संतुलन के मजबूत आधार हैं।
आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, जल संकट और सीमित प्राकृतिक संसाधनों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब आवश्यक है कि विकास और जनसंख्या के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। इसके लिए सरकारों के साथ-साथ समाज, शिक्षण संस्थानों, धार्मिक संगठनों और प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
विश्व जनसंख्या दिवस हमें यह संदेश देता है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी जनसंख्या की संख्या में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की गुणवत्ता में होती है। शिक्षित, स्वस्थ, कुशल और जागरूक नागरिक ही विकसित राष्ट्र की पहचान होते हैं।
आइए, इस विश्व जनसंख्या दिवस पर हम यह संकल्प लें कि शिक्षा, जागरूकता, महिला सम्मान, स्वास्थ्य और जिम्मेदार नागरिकता के माध्यम से एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देंगे, जहां बढ़ती जनसंख्या बोझ नहीं बल्कि विकास की सबसे बड़ी पूंजी बने।
तबस्सुम अब्बास
शिक्षिका एवं सामाजिक चिंतक

