रिपोर्ट: एस. मुनीर
अलीगढ़। मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के विरोध में समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को शहर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी के नेतृत्व में अलीगढ़ कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने जिला अधिकारी के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने के प्रस्ताव पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की।
इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े मामलों में संविधान, कानून और न्याय के सिद्धांतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा किसी भी निर्णय से पहले सभी पहलुओं की निष्पक्ष और गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी ने पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का कहना है कि दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के लिए पुलिस पर दबाव बनाए जाने की बात कही गई थी। पार्टी का आरोप है कि इसी के बाद पुलिस ने प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करते हुए ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान शहर अध्यक्ष मोहसिन मेवाती को तलाशने और हिरासत में लेने का प्रयास किया।
समाजवादी पार्टी के अनुसार, जब मोहसिन मेवाती ने इसका विरोध किया और मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव एडवोकेट इमरान पठान, इसरार सोलंकी तथा इरफान खान ने भी आपत्ति जताई, तो मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने कथित रूप से अपनी सरकारी पिस्टल निकालकर लहराई। पार्टी का दावा है कि इस घटना से प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं और आम लोगों में भय और तनाव का माहौल बन गया। पार्टी ने यह भी कहा कि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिससे कार्यकर्ताओं में रोष फैल गया और पुलिस की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए।
पार्टी के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीओ द्वितीय और सीओ तृतीय मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत कर माहौल को शांत कराया। इसके बाद शहर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी ने कार्यकर्ताओं से शांति, धैर्य और अनुशासन बनाए रखने की अपील की। उनके आह्वान पर सभी कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन सौंपा और कार्यक्रम का समापन किया।
शहर अध्यक्ष मोहसिन मेवाती ने कहा कि समाजवादी पार्टी का पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक था, लेकिन पुलिस की कथित प्रतिशोधात्मक कार्रवाई और अनुचित व्यवहार से तनाव की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव एडवोकेट इमरान पठान ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने तथा विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने या कार्यकर्ताओं को डराने का प्रयास किया गया है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि वायरल वीडियो या अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
समाजवादी पार्टी ने स्पष्ट किया कि यदि लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने या राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई जारी रही, तो पार्टी संविधान और लोकतंत्र के दायरे में रहकर अपना संघर्ष जारी रखेगी। पार्टी ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि कानून का समान और निष्पक्ष पालन ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत कर सकता है।
नोट: पुलिस की कार्यशैली से जुड़े आरोप समाजवादी पार्टी द्वारा लगाए गए हैं। इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है।

