लेखक: अज़हर उमरी, वरिष्ठ पत्रकार
हर वर्ष 26 जुलाई का दिन भारत के इतिहास में अदम्य साहस, वीरता और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हमें उन अमर वीर सपूतों की याद दिलाता है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देकर भारत की सीमाओं की रक्षा की और तिरंगे की शान को अक्षुण्ण रखा।
कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि यह भारत के जवानों के अटूट संकल्प, अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च समर्पण का अनुपम उदाहरण था। दुश्मन ने ऊँची बर्फीली चोटियों पर कब्ज़ा कर भारत की सुरक्षा को चुनौती दी थी, लेकिन भारतीय सेना ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए हर चोटी पर तिरंगा फहराया। यह विजय विश्व के सैन्य इतिहास में साहस और रणनीति का एक स्वर्णिम अध्याय मानी जाती है।
कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय, ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव, राइफलमैन संजय कुमार और अनेक अन्य वीर सैनिकों ने अपने अद्वितीय शौर्य से देशवासियों का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया। इन वीरों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
कारगिल विजय दिवस हमें यह भी सिखाता है कि राष्ट्र की स्वतंत्रता और सुरक्षा की कीमत हमारे सैनिक अपने प्राणों की आहुति देकर चुकाते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह देश की एकता, अखंडता और संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करे तथा सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान में सदैव खड़ा रहे।
आज जब हम कारगिल विजय दिवस मना रहे हैं, तब उन सभी वीर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने अपने वर्तमान का बलिदान देकर हमारा भविष्य सुरक्षित किया। उनका त्याग और बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी संकल्प लें कि देश की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे तथा अपने वीर सैनिकों के त्याग और बलिदान को हमेशा याद रखेंगे।
जय हिंद!
वंदे मातरम्!

