फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ स्थित ऐतिहासिक लोको दरगाह हज़रत मखदूम शाह सैय्यद शहाबुद्दीन औलिया (अलैहि रहमा) पर 28 जुलाई से चार दिवसीय उर्स-ए-मखदूम का शुभारंभ होगा। यह जानकारी रविवार को दरगाह के सज्जादा नशीन शाह मुहम्मद वसीम उर्फ़ मुहम्मद मियां की मौजूदगी में आयोजित प्रेस वार्ता में दी गई। इस अवसर पर उर्स से संबंधित एक विशेष पुस्तिका का भी विमोचन किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार उर्स का आयोजन 28 जुलाई से 31 जुलाई तक चलेगा। इसमें महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद शिरकत करेंगे।
उन्होंने बताया कि यह उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कौमी एकता, आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक है। आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, सिख समेत विभिन्न धर्मों के लोग और मुरीद शामिल होकर दरगाह पर फूल और चादर पेश करेंगे तथा मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली की दुआएं मांगेंगे।
उर्स के दौरान सभी जायरीन और मेहमानों के लिए लंगर-ए-आम का विशेष इंतजाम किया गया है।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि उर्स में देश की कई प्रमुख धार्मिक हस्तियां शिरकत करेंगी। इनमें ज़ीनत-ए-सिलसिला चिश्तिया साबिरिया, शैखुल मशाइख हज़रत शाह अली मंज़र एजाज़ कुद्दूसी साहब क़िबला (सज्जादा नशीन, हुज़ूर साबिर-ए-पाक कलियर शरीफ, उत्तराखंड) प्रमुख हैं।
इसके अलावा शेखुल हिंद शाह अम्मार अहमद अहमदी उर्फ़ नय्यर मियां साहब (सज्जादा नशीन, खानकाह हुज़ूर शेखुल आलम रुदौली शरीफ), सैय्यद आले मुस्तफा उर्फ़ सोहेल मियां (दरगाह हुज़ूर वारिस-ए-पाक, देवा शरीफ), ख़तीब मौलाना प्रो. सैय्यद मुक्तिदा हुसैन जाफरी मदारी (सज्जादा नशीन, मकनपुर शरीफ), मौलाना सैय्यद नुरुल अराफात जाफरी मदारी, मुफ्ती सैय्यद शजर अली मदारी तथा प्रसिद्ध शायर यूसुफ हातिफ़ अलीगढ़ भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगे।
उर्स के दौरान मशहूर कव्वालों की सूफियाना प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी, जिनमें देशभर से आए जायरीन बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

