लखनऊ। अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में तैयार किया गया गोमतीनगर स्थित जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) अब निजी क्षेत्र के संचालन में जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में जेपीएनआईसी को वृंदावन बाटलर्स प्राइवेट लिमिटेड एंड राकवुड होटल्स एंड रिजार्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 30 वर्ष की लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
लीज के बदले चयनित कंपनी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को प्रतिवर्ष छह करोड़ रुपये लीज रेंट देगी। इसमें हर वर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान रखा गया है। लंबे समय से बंद पड़ी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अब निजी संचालन के माध्यम से दोबारा सक्रिय करने की तैयारी है।
821.74 करोड़ रुपये हो चुके हैं खर्च
जेपीएनआईसी के निर्माण और विकास पर अब तक 821.74 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। संचालन के लिए चयनित कंपनी से 10.11 करोड़ रुपये अग्रिम राशि तथा 25 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी ली जाएगी।
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि एलडीए लीज से प्राप्त धनराशि को ब्याज सहित संकलित कर प्रदेश सरकार को वापस करेगा। उन्होंने बताया कि 30 वर्षों में सरकार को ब्याज सहित करीब 857 करोड़ रुपये वापस किए जाएंगे।
सरकारी आयोजनों के लिए साल में 50 दिन मुफ्त
सरकार ने जेपीएनआईसी को पूरी तरह निजी व्यावसायिक उपयोग में देने के बजाय सरकारी गतिविधियों के लिए भी प्रावधान रखा है। वर्ष में 50 दिन जेपीएनआईसी सरकारी आयोजनों के लिए नि:शुल्क उपलब्ध रहेगा।
पहले जेपीएनआईसी के संचालन और रखरखाव के लिए 35 वर्ष का अनुबंध प्रस्तावित था। अब सहमति के आधार पर पहली बार 30 वर्ष और दूसरी बार 25 वर्ष तक अनुबंध बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इससे परियोजना के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी संचालक के पास रहेगी।
खेल और आयोजनों का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी
जेपीएनआईसी में ऑडिटोरियम, कन्वेंशन सेंटर, विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, मल्टीपरपज स्पोर्ट्स कोर्ट और मल्टीलेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
सरकार की ओर से विकसित इन उच्चस्तरीय खेल सुविधाओं को आम लोगों के लिए किफायती दरों पर उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे जेपीएनआईसी के केवल बंद पड़ी इमारत बने रहने के बजाय खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सम्मेलनों और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने की उम्मीद है।
त्रिस्तरीय सोसाइटी पहले ही हो चुकी है भंग
जेपीएनआईसी के संचालन के लिए पूर्व में गठित त्रिस्तरीय सोसाइटी को सरकार पहले ही भंग कर चुकी है और परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को हस्तांतरित किया जा चुका है। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद एलडीए के माध्यम से इसके निजी संचालन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
लंबे समय से बंद पड़े जेपीएनआईसी को निजी संचालन के जरिए शुरू करने का फैसला परियोजना को उपयोग में लाने की दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
