तीन नए ट्रस्टियों की भी नियुक्ति, मंदिर प्रशासन को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार, 2 सितंबर को राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया। उनकी नियुक्ति को राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन कार्यों को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों में रहे हैं। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM), अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है। वह भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
38 साल से अधिक का सैन्य अनुभव
एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर 38 वर्षों से अधिक का रहा है। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं। वह फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) में चीफ टेस्ट पायलट तथा दो फ्रंटलाइन एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग रह चुके हैं।
इसके अलावा उन्होंने एयर मुख्यालय में डायरेक्टर (ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप), प्रिंसिपल डायरेक्टर (ASR) और असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया। वह ASTE के कमांडेंट और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन एंड ट्रेनिंग से जुड़े डिप्टी चीफ की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी संभालने से पहले वह इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशंस) के डिप्टी चीफ के पद पर कार्यरत थे।
तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त
राम मंदिर ट्रस्ट ने प्रशासनिक फेरबदल के तहत तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति भी की है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं।
ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा हुई। बताया गया है कि महेश भागचंदका का संबंध विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के परिवार से है।
एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की बतौर पहले CEO नियुक्ति और तीन नए ट्रस्टियों को शामिल किए जाने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। माना जा रहा है कि इससे मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, प्रबंधन और भविष्य की व्यवस्थाओं को अधिक सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
