2024 लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक प्रत्याशी उतारने वाली आम जनमत पार्टी को मिला भारी चंदा, संस्थापक अध्यक्ष का BJP से जुड़ाव भी चर्चा में
नई दिल्ली। भारत की राजनीति में छोटी और गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों को मिलने वाले भारी चंदे को लेकर एक नई पड़ताल ने कई सवाल खड़े किए हैं। BBC की एक जांच में आम जनमत पार्टी का मामला सामने आया है, जिसने 2024 के लोकसभा चुनाव में महज एक उम्मीदवार मैदान में उतारा, लेकिन वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 620 करोड़ रुपये का चंदा मिलने की जानकारी चुनावी रिकॉर्ड में सामने आई है।
आम जनमत पार्टी वर्ष 2020 में पटना में बनी थी। चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक शुरुआती दो वर्षों में पार्टी को 20 हजार रुपये से अधिक का कोई चंदा नहीं मिला था। इसके बाद पार्टी की वित्तीय तस्वीर अचानक बदल गई। वर्ष 2022-23 में करीब 216 करोड़ रुपये का चंदा मिला और अगले वित्त वर्ष में यह राशि बढ़कर करीब 620 करोड़ रुपये हो गई।
एक उम्मीदवार ने लड़ा लोकसभा चुनाव
2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सिर्फ एक प्रत्याशी को मैदान में उतारा। गुजरात की पंचमहल लोकसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार लक्ष्मणभाई गलाभाई बारिया चुनाव लड़े। उन्हें 3,205 वोट मिले और पार्टी कोई सीट जीत नहीं सकी।
संस्थापक अध्यक्ष का BJP से जुड़ाव
BBC की पड़ताल में पार्टी की संस्थापक अध्यक्ष अनामिका पासवान का नाम भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि उन्होंने 2022 में आम जनमत पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। रिपोर्ट में उन्हें वर्तमान में BJP की प्रदेश उपाध्यक्ष बताया गया है।
उनके पति ने उनके इस्तीफे से संबंधित दस्तावेज और पार्टी का बेस पटना से अहमदाबाद स्थानांतरित किए जाने से जुड़ा दस्तावेज भी BBC को दिखाया। वर्तमान में गौरव मिश्रा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
पार्टी का मुख्यालय गुजरात में
पार्टी की मौजूदा वेबसाइट पर उसका पता अहमदाबाद, गुजरात का दिया गया है और गौरव मिश्रा को राष्ट्रीय अध्यक्ष बताया गया है।
हालांकि, इसे सीधे “फर्जी पार्टी” कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। सरकारी रिकॉर्ड में आम जनमत पार्टी एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (RUPP) के रूप में दर्ज है।
620 करोड़ के चंदे ने खड़े किए सवाल
एक ओर जहां देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियां सैकड़ों उम्मीदवारों के साथ चुनाव मैदान में उतरती हैं, वहीं एक ऐसी पार्टी का सामने आना जिसने केवल एक उम्मीदवार उतारा लेकिन उसे सैकड़ों करोड़ रुपये का चंदा मिला, राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता और निगरानी को लेकर सवाल खड़े करता है।
चुनाव आयोग के उपलब्ध रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि आम जनमत पार्टी की वित्त वर्ष 2023-24 की ऑडिटेड रिपोर्ट और योगदान संबंधी रिपोर्ट को लेकर अनुपालन संबंधी पत्राचार हुआ था।
अब बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी धनराशि पार्टी को किन स्रोतों से मिली, उसका इस्तेमाल किस तरह हुआ और राजनीतिक दलों को मिलने वाले भारी चंदे की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
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