लखनऊ। कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के करीब 24 घंटे बाद रविवार को मलबा हटाने के दौरान मस्जिद के नीचे एक कुआं मिलने से मामला चर्चा में आ गया। मलबा साफ कर रही टीम को यह कुआं मस्जिद के नीचे मिला। बताया जा रहा है कि कुएं की गहराई करीब 15 फीट और चौड़ाई लगभग डेढ़ मीटर है।
जानकारी के मुताबिक कुएं के ऊपर एक भारी स्लैब पड़ा हुआ था। पोकलेन मशीन से स्लैब नहीं टूटने पर टीम ने कटर की मदद से उसे हटाया। स्लैब हटाए जाने के बाद नीचे कुआं दिखाई दिया। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कुआं कब बनाया गया था, कितना पुराना है और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होता था। प्रशासन की ओर से इस संबंध में फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
शनिवार को गिराई गई थी दो मंजिला मस्जिद
कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर बनी दो मंजिला मस्जिद को शनिवार सुबह पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में बुलडोजर से ध्वस्त किया गया था। कार्रवाई के लिए सात बुलडोजर लगाए गए थे। प्रशासन की यह कार्रवाई जिला जज की अदालत के 2 सितंबर के आदेश के बाद हुई।
इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को अपने आदेश में मस्जिद के निर्माण को अवैध बताते हुए जमीन खाली कराने और करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश दिया था।
मस्जिद पक्ष ने इस आदेश के खिलाफ 20 जुलाई को जिला जज की अदालत में अपील दाखिल की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज ने 2 सितंबर को अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।
संजय सिंह ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उनके दावे के अनुसार खसरा संख्या 539 की जमीन याकूब खान और वहीद खान के नाम दर्ज है तथा कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद वर्ष 1947 से पहले की बनी हुई है।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाए बिना एकतरफा फैसला देकर मस्जिद को गिरा दिया गया। उन्होंने जमीन के राजस्व रिकॉर्ड और मस्जिद की पुरानगी को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि, प्रशासन की ओर से अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित जमीन को सरकारी भूमि बताया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश में पुराने राजस्व अभिलेखों का हवाला देते हुए कहा गया था कि फसली वर्ष 1324 और 1359 में जमीन कचहरी-कलेक्ट्रेट के रूप में दर्ज थी।
शिकायत से शुरू हुआ था मामला
मामले की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। उन्होंने जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी जमीन पर कब्जा कर मस्जिद का निर्माण किया गया है। जांच के बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला दर्ज किया गया था।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्यासियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत की गई।
कुएं की मौजूदगी ने बढ़ाए सवाल
मस्जिद के मलबे के नीचे कुआं मिलने के बाद अब उसकी उम्र, निर्माण के उद्देश्य और ऐतिहासिक स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से कुएं के संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
कुएं की वास्तविक स्थिति और उसके इतिहास का पता जांच या पुराने राजस्व एवं अन्य अभिलेखों की पड़ताल के बाद ही चल सकेगा। वहीं, मस्जिद पक्ष और सांसद संजय सिंह द्वारा उठाए गए सवालों पर प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
