समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र और संविधान पर संकट खड़ा करने की कोशिश वही लोग कर रहे हैं जो देश में “एक व्यक्ति का शासन” स्थापित करना चाहते हैं।
अखिलेश यादव ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश का नारा “जय जवान, जय किसान, जय संविधान” होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान पर चर्चा किसी पक्ष–विपक्ष के दायरे में नहीं आनी चाहिए, बल्कि सभी को एक स्वर में उसके संरक्षण के लिए खड़े होना चाहिए।
सपा प्रमुख ने कहा, “संविधान सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि देश की नींव है। लोकतंत्र के लिए सबसे दुखद बात यह है कि संसद में संविधान बचाने की बहस हो रही है, जबकि चर्चा संविधान के अनुसार देश को आगे बढ़ाने की होनी चाहिए। संविधान पर संकट दरअसल लोकतंत्र पर संकट की छाया है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग संविधान को कमज़ोर करना चाहते हैं, वे लोकतंत्र को कमजोर करना चाहते हैं। ऐसे लोग ही एक व्यक्ति का शासन लागू करने की मंशा रखते हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के बिल्कुल विरुद्ध है।
अखिलेश यादव ने कहा कि देश को संविधान के अनुसार चलना चाहिए, “व्यक्तिगत सनक” के आधार पर नहीं। उन्होंने दोहराया कि संविधान नागरिकों को अधिकार देता है, और जो लोग इन अधिकारों को कुचलना चाहते हैं, वे संविधान को नकारने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “संविधान ही संजीवनी है। इसमें देश को अच्छा बनाने और अच्छा बनाए रखने की शक्ति है। संविधान लोकतंत्र का कर्म ग्रंथ है, और हमारे लिए संविधान ही कर्म ग्रंथ है।”
सपा अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान ही पिछड़ा–दलित–अल्पसंख्यक गठबंधन का मार्गदर्शक है, और समाजवादी पार्टी सदैव ऐसे सामाजिक न्याय आधारित गठबंधन का समर्थन करती रही है।

