नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को चुनाव सुधार (SIR) पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS और BJP देश की प्रमुख संवैधानिक व जांच एजेंसियों पर कब्जा कर रही हैं, जिनमें चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई, आईबी और इनकम टैक्स विभाग शामिल हैं।
राहुल ने कहा कि इससे साफ है कि चुनाव आयोग सरकार के निर्देश पर काम कर रहा है, और यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
राहुल गांधी की 3 प्रमुख मांगें
राहुल गांधी ने सदन में चुनाव सुधार को लेकर तीन महत्वपूर्ण मांगें रखीं:
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मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट—चुनाव से कम से कम 1 माह पहले सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाए।
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CCTV फुटेज नष्ट करने के नियम में बदलाव—उन्होंने कहा कि 45 दिन बाद रिकॉर्ड मिटा देना चुनाव की पारदर्शिता को खत्म करता है।
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EVM की जांच की अनुमति—राहुल ने कहा कि विपक्ष को ईवीएम देखने और उसकी सुरक्षा प्रक्रियाओं को समझने का अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा—“वोट चोरी एंटी-नेशनल काम है। हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं, सरकार चुनाव सुधार नहीं चाहती।”
राहुल गांधी ने खड़े किए तीन सवाल
राहुल ने सरकार से सीधे तीन सवाल पूछे:
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चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से CJI को क्यों हटाया गया?
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दिसंबर 2023 में ऐसा कानून क्यों लाया गया, जिसके मुताबिक चुनाव आयुक्तों को दंडित नहीं किया जा सकता?
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चुनाव के 45 दिन बाद CCTV फुटेज डिलीट करने की व्यवस्था क्यों है?
राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव सुधारों में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है, लेकिन सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठा रही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संस्थाओं का राजनीतिक दुरुपयोग जारी रहा, तो लोकतंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

