नई दिल्ली। संसद ने ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ अर्थात वीबी–जी राम जी बिल 2025 को मंज़ूरी दे दी है। राज्यसभा ने बुधवार देर रात इस विधेयक को पारित कर दिया, जबकि लोकसभा ने इसे इससे पहले ही मंज़ूरी दे दी थी।
सरकार के अनुसार, यह कानून वर्ष 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप ग्रामीण विकास के सशक्त ढांचे का निर्माण करेगा। विधेयक के तहत हर वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी दी जाएगी। यह रोज़गार उन वयस्क सदस्यों को मिलेगा जो बिना किसी कौशल वाले शारीरिक कार्य स्वेच्छा से करना चाहते हों।
योजना के लिए केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकारें 40 प्रतिशत वित्तीय योगदान देंगी। हालांकि, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 होगा। राज्य सरकारें बेरोज़गारी भत्ता और मुआवज़ा देने की मौजूदा व्यवस्था भी जारी रखेंगी।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार “राष्ट्र प्रथम” के मंत्र के साथ काम कर रही है और गांवों के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के वंचित वर्गों को लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक ने बिल का विरोध करते हुए दावा किया कि इससे करोड़ों लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गरीबों के उत्थान के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग की।
भाजपा सांसद इंदु बाला गोस्वामी ने कहा कि देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और इस विधेयक का उद्देश्य ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाना है। उनके अनुसार यह कानून विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक सिद्ध होगा।
भाजपा सांसद आदित्य प्रसाद ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस बिल को लेकर उत्साहित हैं और 125 दिनों के मज़दूरी वाले रोज़गार से खुश हैं।
राजद सांसद मनोज कुमार झा ने चर्चा की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून पर पर्याप्त बहस नहीं हुई। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच प्रस्तावित 60:40 फंड शेयरिंग की भी आलोचना की।
तृणमूल कांग्रेस सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने पूछा कि विधेयक पेश करने से पहले राज्यों और अन्य हितधारकों से व्यापक परामर्श क्यों नहीं किया गया।
एआईएडीएमके सांसद डॉ. एम. थंबीदुरई ने कहा कि ग्रामीण भारत में रोज़गार आजीविका, सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने रोज़गार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 किए जाने को विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण और स्वागतयोग्य विशेषता बताया।
बहस में समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन, कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला और दिग्विजय सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन, बीजू जनता दल की सुलता देव, तथा भारतीय मार्क्सवादी पार्टी के डॉ. वी. शिवदासन सहित कई सांसदों ने भाग लिया।

