
ज्ञापन में बताया गया कि 3 फरवरी को शबे-बरात का त्योहार है, जिसमें पूरी रात इबादत की जाती है। लोग अपने बुजुर्गों की कब्रों पर जाकर फातिहा पढ़ते हैं और मस्जिदों में विशेष नमाज़ अदा करते हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में धार्मिक जलसे भी आयोजित होते हैं। इसके बाद 17 और 18 फरवरी से रमज़ान का पवित्र महीना शुरू होने जा रहा है।
ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश के जिला अध्यक्ष अदनान कुरैशी ने कहा कि पहले मुस्लिम त्योहारों से पूर्व जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा सभी विभागों व शहर के संभ्रांत लोगों के साथ बैठकें आयोजित की जाती थीं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह परंपरा बंद हो गई है। इसका नतीजा यह हुआ कि मुस्लिम बहुल इलाकों में विकास कार्य ठप पड़ गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम मोहल्लों में गंदगी बनी रहती है, नालियां जाम हैं और खरंजे व सड़कें टूटे होने से लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन मुसलमानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है।
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की गई कि पूर्व की भांति मुस्लिम त्योहारों से पहले जिला व पुलिस प्रशासन की समन्वय बैठकें कराई जाएं। साथ ही जिलाधिकारी से अनुरोध किया गया कि मुस्लिम इलाकों में पानी, बिजली, सफाई, नाली और सड़क/खरंजा व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराया जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में अदनान कुरैशी, मोहम्मद शरीफ कुरैशी, काले भाई, डॉक्टर सिराज कुरैशी, हाजी कदीर, हाजी पापू, मोहम्मद कासिम, हाजी अंसार, हाजी उन्ना, हाजी चाद, हाजी हीरो, हाजी रसीदो, हाजी बंटू और मुन्ना सर शामिल रहे।

