पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल के वरिष्ठ नेता अशोक यादव अपने तीन दिवसीय दौरे पर पहले दिन आगरा पहुंचे
आगरा में उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन के कामकाज की समीक्षा की और कार्यकर्ताओं में जोश भरा।
आगरा। अशोक यादव ने कार्यकर्ताओं से संघर्ष की अपील करते हुए कहा कि यूपी में जितनी विधानसभा सीटें हैं, चुनाव में उतने दिन नहीं बचे। काम ज्यादा है और समय कम। लिहाजा अभी से सभी कार्यकर्ता चुनाव की तैयारियों में पूरी ताकत से जुट जाएं। जनता के साथ संवाद करें। उनकी समस्याएं सुनें और उनका निराकरण कराएं। पार्टी की नीतियों से उन्हें अवगत कराएं। RLD का उद्देश्य BJP के साथ कदमताल करते हुए सत्ता की सीढ़ियों को समाजसेवा से जोड़ते हुए समाज का भला करना है। छोटे भाई की तरफ गठबंधन में रहते हुए छोटे भाई यानि बीजेपी को मजबूत करना है। मिलकर बेहतर समाज का निर्माण करना है।
आगरा पहुंचने पर राष्ट्रीय लोक दल के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पूर्व मंत्री अशोक यादव का भव्य स्वागत किया। इस मौके पर नए लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। उन्होंने कहा कि उनका झंडा बदला है लेकिन तेवर वही पुराना है। आगरा के लोगों के साथ अपने पुराने संबंधों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आप लोग जमीन पर खूब मेहनत करें और जयंत चौधरी जी के हाथों को मजबूत करें। किसानों के मसीहा और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के सपनों का साकार करना है।
सम्मान समारोह के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि RLD की गाड़ी पहले मथुरा आते आते धीमी हो जाती थी लेकिन इस बार मथुरा से आगे निकलते हुए रफ्तार के साथ वाराणसी तक ले जाना है। आगरा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, एटा, मैनपुरी और इटावा में समाजवादी पार्टी पहले मजबूत रहती थी, आगामी विधानसभा चुनाव में कमजोर करेंगे।
जयंत चौधरी के बारे में चवन्नी वाला बयान देने वाले अखिलेश यादव को इस बार चुनाव में इकन्नी बना कर उनको धरातल पर पटखनी देंगे। अखिलेश का PDA सिर्फ एक जुमला है बल्कि सच्चाई ये है कि उनको समाज के भले से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने सिर्फ अपने परिवार को आगे बढ़ाया। उनका PDA “परिवार डेवलपमेंट एजेंडा” से ज़्यादा कुछ नहीं और अब लोग इस हकीकत को समझ गए हैं।
अशोक यादव ने 1993 में अपने जीवन का पहला चुनाव ही पूर्व मुख्यमंत्री और तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ शिकोहाबाद से लड़ा था। मुलायम चुनाव जीत तो गए थे लेकिन अशोक यादव ने बेहद कड़ी टक्कर देते हुए मुलायम सिंह को इतना डरा दिया कि वो दोबारा शिकोहाबाद से चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सके। इतना ही नहीं, जब अशोक यादव मैनपुरी से लोकसभा चुनाव में मुलायम को टक्कर देने पहुंचे तो मुलायम ने सीट बदल ली और वो संभल से लड़े। जबकि उस समय क्षेत्र के सभी 5 विधायक, 9 में से 8 ब्लॉक प्रमुख सपा के थे उसके बावजूद मुलायम सिंह मैदान छोड़ गए।
यादव समाज में घोसी समुदाय की हिस्सेदारी 85 फीसदी है जबकि कमरिया सिर्फ 15 फीसदी। अशोक यादव घोसी समुदाय के हैं और यादवों के बीच जमीनी मजबूत नेता माने जाते हैं। फिलहाल वो राष्ट्रीय लोक दल को पश्चिमी यूपी और जाट लैंड से आगे बढ़ाते हुए पार्टी को बड़ी पहचान दिलाने के अभियान पर सक्रिय हैं। चुनाव करीब आते आते उनका ये अभियान न सिर्फ मजबूत होगा बल्कि नया आकार लेता हुए दिखाई देगा।

