भोपाल। बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की चर्चा केवल एक विश्वविद्यालय के नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और उन महान हस्तियों की स्मृतियों से जुड़ा विषय है, जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सुफ़ियान अली क़ुरैशी ने जारी बयान में कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे। उन्होंने अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध न केवल भारत में बल्कि विश्व के विभिन्न देशों में रहकर भी आज़ादी की अलख जगाई। उनका पूरा जीवन देश की स्वतंत्रता के उद्देश्य को समर्पित रहा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1915 में अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी में भारत की पहली अस्थायी सरकार का गठन किया गया था। इस सरकार में राष्ट्रपति बने थे, जबकि मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली को प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक गौरवशाली अध्याय है और भोपाल सहित पूरे देश के लिए सम्मान का विषय है कि इस महान व्यक्तित्व ने आज़ादी की लड़ाई में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
सुफ़ियान अली क़ुरैशी ने कहा कि मौलाना बरकतुल्लाह की इन्हीं सेवाओं और बलिदानों को सम्मान देने के उद्देश्य से वर्ष 1988 में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर रखा गया था। उस समय मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री थे। उन्होंने बताया कि इस पहल को आगे बढ़ाने में मध्य प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं पूर्व राज्यपाल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उनका उद्देश्य था कि आने वाली पीढ़ियाँ मौलाना बरकतुल्लाह के संघर्ष और देश के प्रति उनके योगदान को हमेशा याद रखें।
उन्होंने कहा कि सरकार को नई यूनिवर्सिटियाँ स्थापित करने, नए कॉलेज खोलने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए। केवल संस्थानों के नाम बदलने से न तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा और न ही युवाओं की समस्याओं का समाधान होगा।
क़ुरैशी ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसके इतिहास, विरासत और महान व्यक्तित्वों से होती है। मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली का नाम केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि भारत की आज़ादी, संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। नाम बदले जा सकते हैं, लेकिन इतिहास को नहीं बदला जा सकता। बोर्ड बदले जा सकते हैं, लेकिन देश के लिए कुर्बानी देने वाले महान लोगों को इतिहास और जनता के दिलों से मिटाया नहीं जा सकता।
उन्होंने युवाओं को बेहतर शिक्षा और अवसर प्रदान करने पर ज़ोर देते हुए कहा कि देश का भविष्य नफ़रत और विभाजन से नहीं, बल्कि शिक्षा, समझदारी और आपसी भाईचारे से निर्मित होता है। उन्होंने कहा, “क़ौमें तफ़रीक़ से नहीं, तालीम से बनती हैं।”

