बीजिंग/शंघाई: चीन में इन दिनों एक नया सामाजिक और आर्थिक संकट तेजी से गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि अब यहां “मृत्यु” भी आम लोगों के लिए महंगी होती जा रही है। प्रमुख शहरों, खासकर शंघाई में कब्रिस्तानों की भारी कमी और अंतिम संस्कार की आसमान छूती लागत ने नागरिकों को गंभीर परेशानी में डाल दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 के मध्य तक शंघाई में केवल 54 व्यावसायिक कब्रिस्तान ही उपलब्ध रहेंगे, जिनमें से अधिकांश पहले से ही लगभग भर चुके हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि वर्ष 2023 में एक कब्र की कीमत करीब 7,60,000 युआन प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई—जो शहर में औसत मकान की कीमत से कई गुना अधिक है।
फ्लैट बने ‘अस्थि गृह’
महंगी कब्रों और जगह की कमी के चलते कुछ परिवारों ने अनोखा तरीका अपनाया है। लोग अब रिहायशी फ्लैट खरीदकर उनमें अपने प्रियजनों की अस्थियां रखने लगे हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि कब्रिस्तान की जमीन आमतौर पर सिर्फ 20 साल के लिए मिलती है, जबकि आवासीय संपत्ति 70 साल तक वैध रहती है।
सरकार ने लगाया प्रतिबंध
इस बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए चीनी सरकार ने सख्त कदम उठाया है। 30 मार्च से लागू नए नियमों के तहत अब रिहायशी संपत्तियों में मानव अस्थियों को रखना प्रतिबंधित कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
फैसले पर छिड़ी बहस
हालांकि, इस सरकारी निर्णय के बाद देशभर में बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि यह प्रतिबंध असल समस्या—महंगे अंतिम संस्कार और कब्रिस्तानों की कमी—का समाधान नहीं करता, बल्कि आम नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ा सकता है।
बदल सकती हैं अंतिम संस्कार की परंपराएं
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो चीन में अंतिम संस्कार की पारंपरिक व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार के सामने अब चुनौती है कि वह इस संकट का दीर्घकालिक और व्यवहारिक समाधान तलाशे।

