संवाद – विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में चकबंदी कार्य में धीमी गति और भ्रष्टाचार के कारण किसानों में आक्रोश है। भारतीय किसान यूनियन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर चकबंदी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम खप्टिहा खुर्द, बहिंगा, अमलीकौर, महबरा, सिलेहटा और माचा जैसे गाँव सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। चकबंदी विभाग में सभी स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
किसानों ने पिछले दो वर्षों से जिलाधिकारी, चित्रकूट धाम बांदा के आयुक्त, चकबंदी आयुक्त और मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। हालांकि, उनकी शिकायतों पर अपेक्षित जांच या कार्रवाई नहीं की गई। यूनियन ने आरोप लगाया कि शिकायतों पर कागजी प्रगति दिखाकर लीपापोती की गई और जांच उन्हीं अधिकारियों या निचले स्तर के अधिकारियों से कराकर गुणवत्ताहीन और फर्जी निस्तारण किया गया।
मुख्यमंत्री जनता दर्शन में दर्जनों शिकायतें चकबंदी आयुक्त के आदेश के बावजूद लंबित हैं। पूर्व में हुई जांचों की किसी भी सिफारिश पर कोई अमल नहीं किया गया। हाल ही में आयुक्त चित्रकूट धाम बांदा की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में डीडीसी महोबा और बांदा को शिकायत पत्रों की जांच के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कई स्मरण पत्र भेजने के बावजूद आज तक जांच शुरू नहीं हुई है।
ग्राम बहिंगा, खप्टिहा खुर्द, अमलीकौर और महबरा के ग्राम पंचायत प्रस्तावों पर भी विचार नहीं किया गया और उन्हें निदेशालय नहीं भेजा गया। विरासत, दाखिल-खारिज, चाकमार्गों/चकनिर्माण के निर्माण तथा अंश विभाजन आपत्ति/अपीलों में व्यापक धांधली के कारण किसानों को भारी आर्थिक और मानसिक क्षति हुई है।
ज्ञापन में सहायक चकबंदी अधिकारी नीरज, अरुण नारायण, रामबिलास आजाद, अजय कुमार, चकबंदी अधिकारी पैलानी अखिलेश कुमार, निवर्तमान और वर्तमान बंदोबस्त अधिकारी तथा कुछ लेखपाल/कानूनगो की भूमिका को किसानों और चकबंदी प्रावधानों के खिलाफ बताया गया है। किसानों का कहना है कि इन अधिकारियों के रहते उनके हित सुरक्षित नहीं हैं और न्याय की अंतिम आशा के रूप में अब केवल अनशन या सत्याग्रह ही विकल्प बचा है।

