लखनऊ/नई दिल्ली। हालिया चुनाव नतीजों में इमरान प्रतापगढ़ी एक ऐसे नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जिन्होंने दक्षिण से पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत तक अपने प्रचार से गहरी छाप छोड़ी। केरल से लेकर असम और फिर पश्चिम बंगाल तक कांग्रेस के प्रदर्शन में उनके अभियान की अहम भूमिका मानी जा रही है।

बताया जा रहा है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने उन्हें केरल में सीनियर ऑब्ज़र्वर बनाकर भेजा था। वहां उन्होंने लगातार डेरा डालते हुए 26 विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं कीं। इन सभाओं के जरिए उन्होंने खासतौर पर अल्पसंख्यक समुदाय में मजबूत पकड़ बनाई। चुनाव परिणामों में कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग गठबंधन को बड़ी सफलता मिली और जिन सीटों पर प्रतापगढ़ी ने प्रचार किया, वहां जीत दर्ज होने का दावा किया जा रहा है।
असम में भी दिखा असर
न्याय योद्धा अयाज़ खान अच्छू के अनुसार, असम में शुरुआत में बदरुद्दीन अजमल और असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता से मुकाबला दिलचस्प लग रहा था। लेकिन कांग्रेस ने रणनीति बदलते हुए इमरान प्रतापगढ़ी को वहां भेजा। उन्होंने उन 9 विधानसभा क्षेत्रों में रैलियां कीं, जहां विपक्षी दलों का फोकस था। नतीजों में इन सीटों पर कांग्रेस को बढ़त या जीत मिलने की बात सामने आई है।
बंगाल में भी खुला खाता
वहीं पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस ने अपना खाता खोलते हुए फरक्का सीट पर जीत दर्ज की, जहां इमरान प्रतापगढ़ी ने एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था।
नेताओं की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस के मीडिया प्रभारी बशीर उल हक रॉकी ने कहा कि इमरान प्रतापगढ़ी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि यह परिणाम उनके प्रभावी संवाद, जमीनी संपर्क और रणनीतिक प्रचार का नतीजा है।
कुल मिलाकर, केरल से असम और बंगाल तक फैले इस चुनावी सफर में इमरान प्रतापगढ़ी ने कांग्रेस के लिए एक मजबूत प्रचारक की भूमिका निभाते हुए राजनीतिक हलकों में अपनी अलग पहचान बनाई है।

