अलीगढ़। एसोसिएशन ऑफ मुस्लिम प्रोफेशनल्स द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक परिसर में आयोजित इंटरनेशनल ज़कात कॉन्फ्रेंस 2026 ज्ञान, विमर्श और सामाजिक प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। देश-विदेश से आए इस्लामिक स्कॉलर्स, अर्थशास्त्रियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने ज़कात को समकालीन सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के समाधान के रूप में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
इस गरिमामय आयोजन में आगरा चैप्टर ने चैप्टर हेड सैय्यद मोहताशिम अली के नेतृत्व में सक्रिय एवं प्रभावशाली भागीदारी दर्ज कराई। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ पत्रकार अजहर उमरी, डॉ. नसीम अख्तर तथा इंजीनियर मुहम्मद आदिल शामिल रहे। प्रतिनिधियों ने विभिन्न तकनीकी और वैचारिक सत्रों में भाग लेते हुए ज़कात के पारदर्शी प्रबंधन, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, स्कॉलरशिप मॉडल और आत्मनिर्भरता आधारित योजनाओं पर अपने विचार साझा किए।
कॉन्फ्रेंस के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ज़कात को केवल एक धार्मिक कर्तव्य के रूप में नहीं, बल्कि गरीबी उन्मूलन, शिक्षा विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाले सशक्त आर्थिक उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए। कई वक्ताओं ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से ज़कात वितरण प्रणाली को अधिक संगठित और प्रभावी बनाने के सुझाव भी प्रस्तुत किए।
चैप्टर हेड सैय्यद मोहताशिम अली ने अपने वक्तव्य में कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच मुस्लिम समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में नई राहें खोलते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कॉन्फ्रेंस से प्राप्त अनुभव और विचार आगरा सहित अन्य शहरों में भी सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा देंगे।
कार्यक्रम ने सामाजिक जिम्मेदारी, पारदर्शिता और सामुदायिक एकजुटता का स्पष्ट संदेश देते हुए यह सिद्ध किया कि संगठित प्रयासों से ज़कात व्यवस्था को एक मजबूत और प्रभावशाली सामाजिक आंदोलन में बदला जा सकता है।

