(एक समन्वयात्मक और तथ्यपरक लेख )
लेखक: — अज़हर उमरी
ईसा मसीह (Jesus Christ) विश्व इतिहास की उन महानतम हस्तियों में से हैं, जिनका प्रभाव धर्म, संस्कृति और मानवता पर गहराई से पड़ा है। ईसाई धर्म के साथ-साथ इस्लाम में भी ईसा मसीह को अत्यंत सम्मान और आदर का स्थान प्राप्त है। अक्सर यह भ्रांति पाई जाती है कि इस्लाम ईसा मसीह को नहीं मानता, जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। इस्लाम न केवल ईसा मसीह को मानता है, बल्कि उन्हें अल्लाह के महान पैग़म्बरों में शामिल करता है।
इस्लाम में ईसा मसीह का स्थान
इस्लाम में ईसा मसीह को हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम कहा जाता है। वे अल्लाह के भेजे हुए रसूल और नबी हैं। क़ुरआन के अनुसार वे पाँच महान पैग़म्बरों (उलुल-अज़्म) में से एक हैं—हज़रत नूह, हज़रत इब्राहीम, हज़रत मूसा, हज़रत ईसा और हज़रत मुहम्मद ﷺ। इस्लाम में ईसा मसीह को ईश्वर या ईश्वर का पुत्र नहीं माना गया, बल्कि उन्हें अल्लाह का बंदा और उसका पैग़म्बर बताया गया है।
क़ुरआन स्पष्ट रूप से कहता है कि ईसा मसीह अल्लाह के रसूल हैं और उनकी शिक्षाओं का उद्देश्य मानवता को एकेश्वरवाद, नैतिकता और सत्य के मार्ग पर चलाना था।
हज़रत मरियम (मैरी) का सम्मान
इस्लाम में ईसा मसीह की माता हज़रत मरियम (अ.) को अत्यंत पवित्र और सम्मानित स्त्री माना गया है। क़ुरआन की एक पूरी सूरह उनके नाम पर है—सूरह मरियम। उन्हें अल्लाह द्वारा चुनी हुई और संसार की श्रेष्ठ महिलाओं में से एक बताया गया है। यह तथ्य स्वयं इस्लाम में ईसा मसीह और उनके परिवार के उच्च स्थान को दर्शाता है।
चमत्कारी जन्म और चमत्कार
इस्लाम के अनुसार ईसा मसीह का जन्म बिना पिता के हुआ, जो अल्लाह की शक्ति का एक महान चमत्कार है। क़ुरआन इस घटना की तुलना हज़रत आदम (अ.) की पैदाइश से करता है, जिन्हें बिना माता-पिता के पैदा किया गया।
ईसा मसीह ने अल्लाह के आदेश से कई चमत्कार किए—जन्म से अंधों को दृष्टि देना, कोढ़ियों को ठीक करना, मृतकों को जीवित करना और मिट्टी से पक्षी बनाकर उसमें जान डालना। इन सभी चमत्कारों को इस्लाम अल्लाह की अनुमति और शक्ति का परिणाम मानता है।
सूली और पुनरागमन की मान्यता
इस्लाम का मत है कि ईसा मसीह को न तो सूली पर चढ़ाया गया और न ही उनकी हत्या की गई। अल्लाह ने उन्हें बचा लिया और अपनी ओर उठा लिया। इसके साथ ही इस्लाम में यह विश्वास भी है कि क़यामत से पहले ईसा मसीह का पुनः आगमन होगा। वे अन्याय का अंत करेंगे, दज्जाल का विनाश करेंगे और संसार में न्याय व शांति स्थापित करेंगे।
ईसा मसीह और पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ
इस्लाम सभी पैग़म्बरों पर समान रूप से ईमान लाने की शिक्षा देता है। ईसा मसीह और पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ दोनों अल्लाह के रसूल हैं और उनके संदेश मूल रूप से एक ही—एकेश्वरवाद और मानव कल्याण—पर आधारित हैं। इस्लाम में किसी एक पैग़म्बर को मानकर दूसरे का इनकार करना आस्था के विपरीत है।
ईसा मसीह और इस्लाम के संबंध को समझना आपसी सम्मान, धार्मिक सहिष्णुता और संवाद के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस्लाम ईसा मसीह का विरोध नहीं करता, बल्कि उन्हें एक महान पैग़म्बर, मार्गदर्शक और मानवता के उपकारक के रूप में स्वीकार करता है। आज के दौर में जब धार्मिक गलतफहमियाँ संघर्ष का कारण बनती हैं, तब ईसा मसीह और इस्लाम की यह साझा विरासत विश्व शांति और भाईचारे का मजबूत आधार बन सकती है।

