मुहम्मद इक़बाल का पैग़ाम
आगरा। होली हिंदू समाज का एक प्रमुख और पारंपरिक त्योहार है, जिसे हमारे ब्रदरे-वतन पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं। इस अवसर पर इस्लाम की शिक्षाएँ हमें संयम, सद्भाव, अच्छे आचरण और पड़ोसियों के साथ भलाई का व्यवहार करने की ताकीद करती हैं।
मुहम्मद इक़बाल, ख़तीब मस्जिद नहर वाली, सिकंदरा आगरा ने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वे अपने दीन पर मज़बूती से कायम रहते हुए अमन, मोहब्बत और भाईचारे का संदेश दें। यदि कोई व्यक्ति होली के अवसर पर आप पर रंग डालने का प्रयास करे, तो उसे विनम्रता और शालीनता के साथ मना किया जा सकता है और समझाया जा सकता है कि यह आपके लिए उचित नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इसके बावजूद किसी पर रंग लग जाए तो घबराने या भ्रम में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। रंग को पानी से धोया जा सकता है और कपड़ों पर लगे रंग को साबुन या डिटर्जेंट से साफ किया जा सकता है। इस्लाम में होली का रंग लग जाने को जहन्नम या किसी दीऩी सज़ा से जोड़ना बिल्कुल गलत और निराधार बात है।
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया:
“जो व्यक्ति अपने ऊपर कोई नजासत पाए, उसे तुरंत पाक कर ले।”
(सुनन अबू दाऊद, हदीस संख्या 354)
इस हदीस से यह शिक्षा मिलती है कि यदि किसी के ऊपर कोई गंदगी या नापाक चीज़ लग जाए तो उसे साफ कर लेना चाहिए। अतः यदि रंग लग भी जाए तो ग़ुस्ल या अच्छी तरह सफाई कर लेना पर्याप्त है।
उन्होंने आगे कहा कि हमारे लिए मूल सिद्धांत यह है कि हम शिर्क और अनैतिक बातों से बचें तथा अपने ईमान और दीन की हिफाज़त करें। साथ ही, जहाँ तक संभव हो, समाज में प्रेम, सौहार्द और आपसी सम्मान का रिश्ता मजबूत बनाए रखें।
अंत में उन्होंने अपील की कि त्योहारों के मौसम में अफवाहों से बचें, सही जानकारी साझा करें और शांति व भाईचारे के वातावरण को बनाए रखें।

