राष्ट्र में शांति को बढ़ावा देने हेतु सूफी संस्थानों एवं दरगाहों की सामूहिक राष्ट्रीय आवाज
नई दिल्ली। इंडिया इस्लामिक सेंटर में आयोजित प्रेस मीट से पूर्व ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल (AISSC) के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से शिष्टाचार भेंट की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व काउंसिल के अध्यक्ष हज़रत सैयद नसरुद्दीन चिश्ती साहब ने किया, जो अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख के उत्तराधिकारी हैं। प्रतिनिधिमंडल में देशभर की विभिन्न प्रसिद्ध दरगाहों से जुड़े प्रमुख सज्जादानशीन शामिल थे।

भेंट के दौरान सूफीमत की उस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसने भारत में एकता, शांति और राष्ट्रभाव को सदैव सुदृढ़ किया है। प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सूफी परंपरा प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देकर भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूत करती रही है तथा वर्तमान समय में भी कट्टरता और विभाजनकारी विचारधाराओं के विरुद्ध एक सकारात्मक, राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा मार्ग प्रस्तुत करती है।
इसके पश्चात “राष्ट्र में शांति को बढ़ावा” विषय पर आयोजित प्रेस मीट में सूफी परंपरा द्वारा सदियों से दिए जा रहे प्रेम, सौहार्द और भाईचारे के संदेश को प्रमुखता से रखा गया।
मीडिया को संबोधित करते हुए काउंसिल के अध्यक्ष हज़रत सैयद नसरुद्दीन चिश्ती साहब ने कहा कि वर्तमान सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों में शांति और एकता की रक्षा धार्मिक नेतृत्व, नागरिक समाज, मीडिया और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने “मेरा मुल्क, मेरी पहचान” नारे के अंतर्गत एक राष्ट्रव्यापी जनजागरूकता अभियान की घोषणा की। इस अभियान का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना तथा देश को तोड़ने वाली कट्टर और विभाजनकारी ताकतों का डटकर मुकाबला करना है। अभियान के तहत काउंसिल देश के प्रत्येक राज्य और शहर में जाकर शांति, भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों का संदेश देगी।
हज़रत चिश्ती साहब ने कहा कि सूफी समाज और दरगाहों ने सदियों से भारत में आपसी सद्भाव और सामाजिक समरसता को मजबूत किया है। उन्होंने ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के दिल्ली स्थित मुख्यालय कार्यालय के उद्घाटन को सूफी संस्थानों और दरगाहों की एक सामूहिक राष्ट्रीय आवाज बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। इससे इस्लाम की सच्ची, शांतिपूर्ण और इंसानियत पर आधारित तस्वीर राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत की जा सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया के हर मुस्लिम देश में भारत का सम्मान हो रहा है, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत में सभी धर्मों और समुदायों को समान आदर और अवसर प्राप्त हैं। यह सम्मान उन तत्वों के लिए करारा जवाब है जो देश को बदनाम करने और उसकी छवि को नुकसान पहुंचाने की नापाक कोशिशें करते रहते हैं।
इस प्रेस मीट में देशभर से 25 से अधिक प्रमुख सज्जादानशीनों और सूफी विद्वानों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से उपस्थित हस्तियों में शामिल रहे—
सैयद फरीद अहमद निज़ामी साहब — दरगाह निज़ामुद्दीन
अली शाह साहब — कलियर शरीफ
नय्यर मियां साहब — रदौली शरीफ, उत्तर प्रदेश
डॉ. हबीबुर रहमान नियाज़ी साहब — जयपुर
सैय्यद मोहतशिम अली साहब — आगरा
अरशद फ़रीदी साहब — फतेहपुर सीकरी
सैयद अली ज़की हुसैनी साहब — गुलबर्गा दरगाह
सैयद अब्दुल क़ादिर क़ादरी साहब — राष्ट्रीय संयोजक, AISSC
गुलाम नज़मी फ़ारूक़ी साहब — राष्ट्रीय सचिव, AISSC
अंत में काउंसिल ने मीडिया जगत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राष्ट्रहित में शांति, एकता और राष्ट्रीय अखंडता के संदेश को आगे बढ़ाने हेतु निरंतर सहयोग की अपील की।

