आगरा: हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रह. अजमेरी संजरी (ख़्वाजा ग़रीब नवाज़) के 814वें सालाना उर्स मुबारक के अवसर पर हर वर्ष की परंपरा को निभाते हुए इस वर्ष भी दरगाह हज़रत सैय्यदना शाह अमीर अबुल उला रह. पर छठी शरीफ़ (कुल शरीफ़ फ़ातिहा) पूरी अकीदत, अदब और शानो-शौकत के साथ अदा की गई।
यह धार्मिक व आध्यात्मिक आयोजन 27 दिसंबर 2025, शनिवार को सुबह 10:30 बजे संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मौरूसी सज्जादा नशीन हज़रत सैय्यद मोहतशिम अली अबुल उलाई रह. तथा नायब सज्जादगान सैय्यद विरासत अली अबुल उलाई, सैय्यद ईशाअत अली अबुल उलाई और सैय्यद कैफ़ अली अबुल उलाई की गरिमामयी उपस्थिति रही।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक रात शेर-ए-ख़ुदा हज़रत अली रज़ि., हज़रत इमाम हसन रज़ि. और हज़रत इमाम हुसैन रज़ि. हज़रत सैय्यदना शाह अमीर अबुल उला रह. के ख़्वाब में तशरीफ़ लाए और उन्हें दरवेशी व फ़कीरी का मार्ग अपनाने का आदेश दिया। इसके बाद हज़रत सैय्यदना रह. अकबराबाद से दिल्ली रवाना हुए, जहां उन्होंने हज़रत ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी रह. और हज़रत ख़्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया रह. की दरगाहों पर हाज़िरी दी, तत्पश्चात वे अजमेर पहुँचे।
अजमेर में प्रवास के दौरान हज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ रह. ने हज़रत सैय्यदना शाह अमीर अबुल उला रह. को तस्बीह का एक मनका प्रदान कर आध्यात्मिक रूप से दीक्षित किया। इसके पश्चात उनके जीवन में असंख्य रूहानी रहस्य प्रकट हुए और उनका जीवन पूरी तरह से आध्यात्मिक सेवा के मार्ग पर अग्रसर हो गया।
आज भी आगरा स्थित हज़रत सैय्यदना शाह अमीर अबुल उला रह. की दरगाह प्रेम, करुणा और आपसी भाईचारे का केंद्र बनी हुई है, जहाँ हर धर्म और समुदाय के लोग एक साथ दुआ और इबादत के लिए एकत्र होते हैं। यह दरगाह सामाजिक सौहार्द और इंसानियत की एक अनुपम मिसाल है।
उर्स के मौके पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए लाखों अकीदतमंदों ने शिरकत की और दरगाह से दुआओं और बरकतों का लाभ प्राप्त किया।

