Government Railway Police (जीआरपी) आगरा की ऑपरेशन मुस्कान टीम ने सराहनीय कार्य करते हुए उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के 5 गुमशुदा बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया। कड़ी मेहनत, तकनीकी संसाधनों और लगातार प्रयासों के बाद इन बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया।
🔹 1. प्रताप विहार, गाजियाबाद (11 वर्षीय बालक)
टीम को नई दिल्ली के शेल्टर होम में एक 11 वर्षीय बालक मिला, जिसने अपना पता प्रताप विहार, गाजियाबाद बताया, लेकिन उसे किसी का मोबाइल नंबर याद नहीं था।
सी-प्लान ऐप और स्थानीय लोगों से संपर्क के जरिए आखिरकार बालक की दादी तक पहुंच बनाई गई। दादी ने बताया कि बच्चा 20 मार्च 2026 को घर से नाराज होकर चला गया था।
आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बालक को उसकी दादी के सुपुर्द कर दिया गया।
🔹 2. विजय नगर, गाजियाबाद (10 वर्षीय बालक)
नई दिल्ली के शेल्टर होम में मिले एक अन्य 10 वर्षीय बालक ने भी गाजियाबाद का पता बताया। मोबाइल नंबर न होने के बावजूद टीम ने लगातार प्रयास जारी रखे।
आखिरकार बालक की मां से संपर्क हुआ, जिन्होंने बताया कि बच्चा 20 मार्च 2026 से लापता था।
CWC की प्रक्रिया के बाद बच्चे को उसकी मां को सौंप दिया गया।
🔹 3. धौलपुर, राजस्थान (10 वर्षीय बालक)
पहाड़गंज, नई दिल्ली के बाल गृह में मिले बालक ने अपना पता इस्लामपुरा, धौलपुर बताया।
बालक द्वारा दिए गए दादी के मोबाइल नंबर से संपर्क स्थापित हुआ, जिसके बाद पिता तक सूचना पहुंचाई गई।
CWC के समक्ष प्रस्तुत कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने पर बालक को उसके पिता के सुपुर्द किया गया।
🔹 4. शाहदरा, दिल्ली (12 वर्षीय बालक)
पुरानी दिल्ली के मोरी गेट बाल गृह में मिले 12 वर्षीय बालक ने बताया कि वह मां की डांट से नाराज होकर घर छोड़ आया था।
बालक की मां से संपर्क कर जानकारी दी गई कि बच्चा सुरक्षित है।
आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद बच्चे को उसकी मां को सौंप दिया गया।
🔹 5. बिजनौर, उत्तर प्रदेश (13 वर्षीय बालक)
पहाड़गंज शेल्टर होम में मिले 13 वर्षीय बालक ने अपना पता बिजनौर बताया, लेकिन मोबाइल नंबर याद नहीं था।
सी-प्लान ऐप और स्थानीय संपर्कों के माध्यम से अंततः बालक के भाई से संपर्क हुआ।
भाई ने बताया कि बच्चा 30 मार्च 2026 से लापता था।
CWC प्रक्रिया के बाद बालक को उसके भाई के सुपुर्द किया गया।
ऑपरेशन मुस्कान टीम की तत्परता, संवेदनशीलता और तकनीकी प्रयासों के चलते 5 परिवारों को उनके खोए हुए बच्चे वापस मिल सके। यह अभियान न केवल पुलिस की जिम्मेदारी का उदाहरण है, बल्कि समाज में विश्वास भी मजबूत करता है।

