तृतीय दिवस महारुद्राभिषेक, रुद्र महायज्ञ एवं श्रीराम कथा में उमड़ी भक्तों की भीड़, “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंजा कथा पंडाल
आगरा। यमुना तट स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर, बूढ़ी का नगला, दयालबाग में चल रहे नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ, श्री रुद्राभिषेक एवं श्रीराम कथा महोत्सव के तृतीय दिवस श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोलेनाथ का महारुद्राभिषेक एवं श्री रुद्र महायज्ञ संपन्न हुआ। वहीं, संध्या में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का भावपूर्ण प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए।
चित्रकूट धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित विमलेश त्रिवेदी ने श्रीराम जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। जैसे ही कथा में भगवान श्रीराम के प्राकट्य का प्रसंग आया, पूरा कथा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भावविभोर होकर भजन-कीर्तन में झूमने लगे और पूरा वातावरण राममय हो गया।
धर्म की रक्षा के लिए भगवान लेते हैं अवतार
कथावाचक पंडित विमलेश त्रिवेदी ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान मानवता के कल्याण के लिए अवतार धारण करते हैं। भगवान का अवतार धर्म की पुनर्स्थापना, सज्जनों की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए होता है।
उन्होंने कहा कि भगवान के अवतार के लिए भारतवर्ष की पावन भूमि को विशेष महत्व प्राप्त है। भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, धर्म और अध्यात्म की आत्मा है। इसी भूमि से धर्म, अध्यात्म और मानवता का संदेश पूरी दुनिया में प्रसारित हुआ है।
दशरथ और दशानन के माध्यम से दिया जीवन का संदेश
कथा व्यास ने भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने राजा दशरथ के यहां अवतार लिया। उन्होंने बताया कि ‘दशरथ’ का आध्यात्मिक अर्थ उस व्यक्ति से है जिसने अपनी दसों इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो, जबकि दशानन रावण दसों इन्द्रियों के भोग-विलास का प्रतीक है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि भगवान श्रीराम का संदेश है कि मनुष्य को अपने जीवन में दशानन नहीं, बल्कि दशरथ बनने का प्रयास करना चाहिए। जब मनुष्य अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तभी उसके जीवन में भगवान का वास्तविक प्राकट्य होता है।
राम जन्म पर आनंद में डूबी अयोध्या
पंडित विमलेश त्रिवेदी ने भगवान श्रीराम सहित चारों स्वरूपों के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान के प्राकट्य से संपूर्ण अयोध्या आनंद और उल्लास से भर उठी थी। राजा दशरथ और माता कौशल्या को बधाई देने के लिए अयोध्यावासी उमड़ पड़े थे।
राम जन्मोत्सव का प्रसंग सुनते ही कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। कथा स्थल पर ऐसा वातावरण बना मानो अयोध्या स्वयं महाकालेश्वर धाम में उतर आई हो।
श्रावण में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व
श्री महाकालेश्वर दरबार के श्री महंत आचार्य पंडित सुनील वशिष्ठ ने रुद्राभिषेक की महिमा बताते हुए कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव का रुद्राभिषेक अत्यंत फलदायी माना गया है। भगवान शिव की आराधना से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि श्री महाकालेश्वर दरबार में आयोजित श्री रुद्र महायज्ञ, रुद्राभिषेक एवं श्रीराम कथा महोत्सव का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।
प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य महारुद्राभिषेक एवं श्री रुद्र महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। इसके बाद शाम को श्रीराम कथा का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
इस अवसर पर पंडित रामचरण शर्मा, सुभाष गिरि, सरिता तिवारी, मोहित, दिव्यांश, प्रियंका अग्रवाल, प्रदीप द्विवेदी, नीलू पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्त मौजूद रहे।

