आगरा। बाबा श्री मनःकामेश्वरनाथ जी के पावन दरबार में दीप प्रज्वलन की परंपरा को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर बाबा के चरणों में दीप प्रज्वलित करते हैं। वहीं शारीरिक, मानसिक अथवा आर्थिक बाधाओं के समय भक्त बाबा से प्रार्थना कर दीप जलाने का संकल्प लेते हैं और कार्य सिद्ध होने पर पुनः दीप प्रज्वलन कर कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
मठ प्रशासक श्री हरिहर पुरी जी ने बताया कि मंदिर में प्रज्वलित 11 अखंड ज्योतियाँ सैकड़ों वर्षों से निरंतर जल रही हैं, जो श्री मनःकामेश्वर मठ की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, अखंड साधना और आस्था की जीवंत साक्षी हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल जैसे कठिन समय में भी इन अखंड ज्योतियों की लौ कभी प्रभावित नहीं हुई, जो बाबा की कृपा और परंपरा की दृढ़ता को दर्शाती है।माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर संपन्न हुआ 11 रुद्र अखंड ज्योति रजतावरण का आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का सशक्त प्रतीक बना, बल्कि श्री मनःकामेश्वर मंदिर की सनातन परंपराओं, तप-तितिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को भी उजागर करने वाला रहा।सायंकाल मठ के मुख्य रजत द्वार तथा अखंड ज्योति के रजतावरण निर्माण में सहयोग देने वाले दीनदयाल आनंद कुमार सर्राफ के प्रतिष्ठान पर मठ प्रशासक श्री हरिहर पुरी जी स्वयं पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिष्ठान संचालक का सम्मान किया तथा उन्हें बाबा श्री मनःकामेश्वरनाथ जी का आशीर्वाद प्रदान किया।

