आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में एमडी प्रथम वर्ष की छात्रा जूनियर डॉक्टर की संदिग्ध मौत के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। पुलिस और जांच एजेंसियों की नजर मृतका के मोबाइल डेटा और विसरा रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिनसे मौत की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है।
मंगलवार को मृतका का परिवार लखनऊ के आशियाना स्थित आवास पहुंचा। मृतका के भाई ने बताया कि पुलिस ने मोबाइल फोन को जांच के लिए भेज दिया है, जबकि पोस्टमार्टम के बाद विसरा सुरक्षित रख लिया गया है। उन्होंने कहा कि इन रिपोर्टों के आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।

परिवार गहरे सदमे में है। भाई के अनुसार, बहन कुछ दिन पहले घर आई थीं और तीन दिन पहले ही आगरा लौटी थीं। “अगर हमें अंदाजा होता कि वह ऐसा कदम उठा लेंगी, तो हम उन्हें वापस नहीं जाने देते,” उन्होंने भावुक होकर कहा। माता-पिता की स्थिति भी बेहद खराब बताई जा रही है।
रविवार को छात्रा अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाई गई थीं। बताया गया कि उनकी मां ने कई बार फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव न होने पर साथियों को कमरे पर भेजा गया। कमरा अंदर से बंद था, जिसे तोड़ने पर वह बेड पर अचेत अवस्था में मिलीं। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने के चलते विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि छात्रा मानसिक तनाव में थीं और उनका इलाज चल रहा था। इससे पहले 27 मार्च को उन्होंने आत्महत्या का प्रयास भी किया था, जिसके बाद उन्हें निगरानी में रखा गया था।
मामले में परिवार ने एक सीनियर डॉक्टर पर उत्पीड़न के आरोप भी लगाए थे, हालांकि प्रारंभिक जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई। बावजूद इसके, संबंधित डॉक्टर के संस्थान में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
संस्थान प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। वहीं पुलिस का कहना है कि हर पहलू से जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
परिवार ने स्पष्ट किया है कि वे जांच रिपोर्ट आने के बाद ही किसी प्रकार की तहरीर या कानूनी कदम उठाने का निर्णय लेंगे। फिलहाल, इस रहस्यमय मौत की सच्चाई सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

