दरगाह हज़रत सलीम चिश्ती (रह.) फतेहपुर सीकरी के सज्जादानशीन अरशद फरीदी रहे विशेष अतिथि, देश में अमन-चैन और तरक्की के लिए हुई दुआ
आगरा। सरताज-ए-आगरा हज़रत सैयदना शाह अमीर अबुल उला (रह.) का कुल शरीफ़ शनिवार (9 सफर 1448 हिजरी) को दरगाह शरीफ़ पर पूरे धार्मिक सम्मान और अकीदत के साथ सम्पन्न हुआ। कुल शरीफ़ की रस्म सज्जादानशीन एवं मुतवल्ली हज़रत सैय्यद मोहतशिम अली अबुल उलाई की सरपरस्ती में अदा की गई।

इस अवसर पर दरगाह हज़रत सलीम चिश्ती (रह.) फतेहपुर सीकरी के सज्जादानशीन जनाब अरशद फरीदी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके आगमन पर दरगाह प्रबंधन ने गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। साथ ही नायब सज्जादगान सैय्यद विरासत अली अबुल उलाई, सैय्यद इशाअत अली अबुल उलाई, सैय्यद कैफ अली अबुल उलाई, ज़ाकिर अली दानिश (हैदराबाद) तथा सूफी ज़ुबेर मियां (हैदराबाद) भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम में सज्जादानशीन साहब के परिवार से सैय्यद इकबाल अली, सैय्यद अरीब अली, सैय्यद आसिम अली, सैय्यद शहाब अली, सैय्यद अज़हर अली सहित देशभर से आए अकीदतमंदों और विशिष्ट मेहमानों ने शिरकत की।
कुल शरीफ़ की शुरुआत पवित्र कुरआन शरीफ़ की तिलावत से हुई। इसके बाद दरगाह परिसर में गुलाबजल का छिड़काव किया गया। मान्यता है कि कुल शरीफ़ के दौरान गुलाबजल की फुहार प्राप्त होने से दुआएँ कबूल होती हैं और मुरादें पूरी होती हैं।
सज्जादानशीन हज़रत सैय्यद मोहतशिम अली अबुल उलाई ने देश की उन्नति, विकास, आपसी भाईचारे, अमन-चैन और विश्व शांति के लिए विशेष दुआ कराई। उन्होंने हज़रत सैयदना शाह अमीर अबुल उला (रह.) के जीवन, उनकी सूफी शिक्षाओं और मुगलकाल में उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में सभी अकीदतमंदों ने दरगाह पर हाज़िरी देकर मुल्क की खुशहाली, इंसानियत की भलाई और सांप्रदायिक सौहार्द की दुआ की।

