रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐☆ (4/5)
दिल की बात कीजिए, अपनों से छुपाइए नहीं
ऐसे दौर में, जब बड़े बजट की एक्शन, रोमांस और थ्रिलर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर राज कर रही हैं, निर्देशक पद्म कुमार राव ने रिश्तों, परिवार और भावनाओं को केंद्र में रखकर एक अलग और संवेदनशील फिल्म बनाने का साहस दिखाया है। “मैक्स मिन और म्याऊज़ाकी” सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने और अपनों से खुलकर संवाद करने का संदेश देने वाली फिल्म है।

कहानी
फिल्म की कहानी सफल बिजनेसमैन रमेश के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी में सफलता तो है, लेकिन सुकून नहीं। पत्नी वसुधा की कैंसर से मृत्यु के बाद वह अकेला पड़ गया है। उसका बेटा मैक्स (महेश) अपने पिता से दूर रहकर संगीत में करियर बनाना चाहता है और अपनी मुस्लिम गर्लफ्रेंड के साथ जीवन जी रहा है। दूसरी ओर, रमेश चाहता है कि बेटा पारिवारिक कारोबार संभाले। पीढ़ियों का टकराव, रिश्तों में बढ़ती दूरियां और इन्हें जोड़ने वाली एक प्यारी बिल्ली ‘म्याऊज़ाकी’ कहानी को भावनात्मक गहराई देती है।

निर्देशन और प्रस्तुति
निर्देशक पद्म कुमार राव ने कहानी को शुरू से अंत तक संतुलित ढंग से पेश किया है। हर किरदार कहानी में अपनी अहम भूमिका निभाता है। हालांकि यदि फिल्म की अवधि 10–15 मिनट कम होती, तो इसकी गति और प्रभाव और बेहतर हो सकता था।

अभिनय
आदिल हुसैन, नफीसा अली, मेधा शंकर और मंदिरा बेदी सहित सभी कलाकारों ने अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। अनुभवी और नई पीढ़ी के कलाकारों का संतुलित अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है।

क्या है खास?
फिल्म की सबसे दिलचस्प बात है ‘म्याऊज़ाकी’ नाम की बिल्ली, जो केवल एक पालतू जानवर नहीं बल्कि परिवार के बिखरे रिश्तों को जोड़ने का प्रतीक बनकर सामने आती है। हिंदी सिनेमा में जहां अक्सर कुत्तों को अहम भूमिका मिलती है, वहीं बिल्ली को इतनी प्रभावी भूमिका में देखना नया और दिलचस्प अनुभव है।
ओवरऑल
मुंबई के मानसून की खूबसूरत पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म आधुनिक रिश्तों की जटिलताओं, परिवार की अहमियत और भावनात्मक जुड़ाव को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है। फिल्म पहले ही कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराही जा चुकी है और पुरस्कार भी जीत चुकी है।

अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो मनोरंजन के साथ दिल को भी छू जाएं, तो “मैक्स मिन और म्याऊज़ाकी” आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
कलाकार: नफीसा अली, मेधा शंकर, मंदिरा बेदी, आदिल हुसैन
निर्देशक: पद्म कुमार राव
निर्माता: शैल ओसवाल, समीक्षा ओसवाल
सेंसर: UA
अवधि: 143 मिनट
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐☆ (4/5)

