लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति का एक और पत्ता खोल दिया है। पार्टी अब ‘आधी आबादी’ यानी महिलाओं को अपने सियासी समीकरण में बड़ी जगह देने की तैयारी में है। सपा के राज्य मुख्यालय में बुधवार को आयोजित महिलाओं को समर्पित कार्यक्रम में मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने PDA को लेकर ऐसी बात कही, जिसने पार्टी की आगामी रणनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी।
कार्यक्रम में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मौजूद डिंपल यादव ने महिलाओं के बीच पार्टी की प्राथमिकता को सामने रखते हुए कहा कि PDA के ‘A’ में आधी आबादी को शामिल किया गया है।
PDA का ‘A’ अब आधी आबादी के लिए
समाजवादी पार्टी अब तक PDA को पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण के रूप में पेश करती रही है। लेकिन डिंपल यादव के बयान के बाद पार्टी के इस फॉर्मूले में महिलाओं को भी प्रमुखता देने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।
डिंपल यादव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। सपा का फोकस अब केवल पारंपरिक सामाजिक समीकरण तक सीमित न रहकर महिला मतदाताओं तक भी अपनी पहुंच मजबूत करने पर दिखाई दे रहा है।
महिला वोटरों पर नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला मतदाता किसी भी दल के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी का महिलाओं को अपने चुनावी नैरेटिव में प्रमुखता देना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डिंपल यादव लंबे समय से महिलाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक मंचों पर उठाती रही हैं। पार्टी में उनकी सक्रियता बढ़ने के साथ सपा उन्हें महिला मतदाताओं के बीच अपने संदेश को पहुंचाने वाले प्रमुख चेहरे के तौर पर भी आगे बढ़ा सकती है।
अखिलेश के साथ डिंपल की जोड़ी होगी चुनावी हथियार?
2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की रणनीति में अखिलेश यादव के साथ डिंपल यादव की भूमिका भी अहम हो सकती है। एक ओर अखिलेश यादव पार्टी के मुख्य राजनीतिक चेहरे के तौर पर सरकार को घेर रहे हैं, वहीं डिंपल यादव महिलाओं और युवा वर्ग के बीच पार्टी का संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।
महिलाओं को PDA के ‘A’ से जोड़ने का संदेश अगर सपा के चुनावी अभियान का स्थायी हिस्सा बनता है, तो यह 2027 के चुनाव में पार्टी के सामाजिक समीकरण को नया विस्तार दे सकता है।
अब सवाल यही है कि क्या ‘आधी आबादी’ PDA का नया चुनावी हथियार बनेगी? समाजवादी पार्टी के इस दांव का असर 2027 के विधानसभा चुनाव में कितना दिखाई देगा, इसका जवाब आने वाले महीनों में देखने को मिलेगा।
