स्नातक विधायक कौन होता है, उसका चुनाव कैसे होता है और स्नातक मतदाता कौन बन सकता है?
लेखक। अज़हर उमरी
वरिष्ठ पत्रकार
अक्सर आपने विधानसभा चुनाव और विधायक के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में एक ऐसा जनप्रतिनिधि भी चुना जाता है, जिसका चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग प्रक्रिया के तहत होता है? इसे आम बोलचाल में ‘स्नातक विधायक’ कहा जाता है। आइए जानते हैं कि स्नातक विधायक कौन होता है, उसका चुनाव कैसे होता है और इसमें मतदान करने के लिए क्या योग्यताएं जरूरी हैं।
1. क्या होता है स्नातक विधायक?
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुने जाने वाले विधान परिषद सदस्य को आम बोलचाल में स्नातक विधायक कहा जाता है। हालांकि, इसका सही संवैधानिक पद विधान परिषद सदस्य (MLC) है, न कि विधानसभा सदस्य (MLA)।
उत्तर प्रदेश में विधानमंडल के दो सदन हैं—विधानसभा और विधान परिषद। विधानसभा के सदस्य सामान्यतः विधानसभा क्षेत्रों से चुने जाते हैं, जबकि विधान परिषद में कुछ सदस्य स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं।
2. स्नातक विधायक का चुनाव कैसे होता है?
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इसमें संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की स्नातक मतदाता सूची में पंजीकृत मतदाता मतदान करते हैं।
मतदान की प्रक्रिया में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में वोट देते हैं। इस चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल संक्रमणीय मत पद्धति का इस्तेमाल किया जाता है।
3. स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता कौन बन सकता है?
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता बनने के लिए सामान्यतः निम्नलिखित योग्यताएं आवश्यक होती हैं:
- आवेदक भारत का नागरिक हो।
- उसकी आयु निर्धारित तिथि पर कम से कम 18 वर्ष हो।
- उसने संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में निर्धारित अवधि से पहले स्नातक की डिग्री प्राप्त की हो या कानून में मान्य समकक्ष योग्यता हासिल की हो।
- वह संबंधित स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी हो।
- उसका नाम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज हो।
महत्वपूर्ण: केवल स्नातक डिग्री होने से अपने आप मतदान का अधिकार नहीं मिल जाता। निर्धारित नियमों के अनुसार मतदाता सूची में पंजीकरण जरूरी है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए डिग्री प्राप्त करने की निर्धारित अवधि सामान्यतः अर्हक तिथि से कम से कम तीन वर्ष पहले की होती है।
4. स्नातक विधायक का काम क्या होता है?
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुना गया विधान परिषद सदस्य विधान परिषद की कार्यवाही में हिस्सा लेता है। वह जनता और अपने निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े मुद्दे सदन में उठा सकता है, सरकार से सवाल कर सकता है और कानून निर्माण की प्रक्रिया में भाग ले सकता है।
वह शिक्षा, रोजगार, बेरोजगारी, युवाओं की समस्याओं, सरकारी कर्मचारियों, शिक्षित वर्ग और क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों को भी सदन में उठा सकता है। हालांकि, इन विषयों पर काम करना केवल उसी का अधिकार नहीं है; दूसरे जनप्रतिनिधि भी इन्हें उठा सकते हैं।
5. सामान्य विधायक और स्नातक विधायक में क्या अंतर है?
सामान्य विधायक (MLA):
- विधानसभा का सदस्य होता है।
- विधानसभा क्षेत्र के मतदाता उसे चुनते हैं।
- विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेता है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुना गया विधान परिषद सदस्य (MLC):
- विधान परिषद का सदस्य होता है।
- संबंधित स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत मतदाता उसे चुनते हैं।
- विधान परिषद की कार्यवाही में हिस्सा लेता है।
दोनों जनप्रतिनिधियों की संवैधानिक भूमिका अलग है। विधान परिषद सदस्य को सामान्य विधानसभा विधायक के समान पद नहीं माना जाना चाहिए।
6. स्नातक मतदाता बनने के लिए क्या करें?
यदि आप स्नातक हैं और आपके क्षेत्र में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव होता है, तो निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना पंजीकरण कराएं। आवेदन, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और अंतिम तिथि की जानकारी भारत निर्वाचन आयोग, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी या संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से प्राप्त की जा सकती है।
निष्कर्ष
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से निर्धारित योग्यता रखने वाले और मतदाता सूची में पंजीकृत स्नातक मतदाता विधान परिषद में अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। इसलिए जरूरी है कि पात्र नागरिक इस व्यवस्था को समझें, समय पर पंजीकरण कराएं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
Times of Taj की अपील: अपने अधिकारों को जानें, मतदाता सूची में अपना नाम जांचें और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।
