युवाओं को केवल उपदेश नहीं, बल्कि अवसर, सहभागिता और नेतृत्व देने की जिम्मेदारी सरकार निभाए – प्रो. जसीम मोहम्मद
नई पीढ़ी से सीधा संवाद स्थापित करें सरकार, जनप्रतिनिधि और स्वयंसेवी संस्थाएं; विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में युवाओं की भागीदारी जरूरी
नई दिल्ली, । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत द्वारा जेन-ज़ी (Gen Z) को राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने और संघ कार्यकर्ताओं को युवाओं के बीच जाकर उनकी भाषा, विचारों तथा आवश्यकताओं को समझने के दिए गए संदेश का सेंटर फॉर नमो स्टडीज के अध्यक्ष प्रो. जसीम मोहम्मद ने स्वागत किया है।
प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि वर्तमान भारतीय परिस्थितियों में नई पीढ़ी को राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। युवाओं की सोच, आकांक्षाओं और बदलती सामाजिक परिस्थितियों को समझे बिना देश के भविष्य की मजबूत आधारशिला नहीं रखी जा सकती।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को भी इस दिशा में विशेष और व्यापक पहल करनी चाहिए थी, हालांकि अभी भी देर नहीं हुई है। सरकार को जेन-ज़ी के साथ सीधा संवाद स्थापित करने और उन्हें राष्ट्रनिर्माण की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी देने के लिए ठोस कार्यक्रम शुरू करने चाहिए।
युवाओं को मिले अवसर और नेतृत्व
प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि युवाओं को केवल उपदेश देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर, निर्णय प्रक्रिया में सहभागिता और नेतृत्व करने का मंच भी उपलब्ध कराना होगा। यह जिम्मेदारी सरकार और समाज दोनों की है।
उन्होंने सुझाव दिया कि देश में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों (NGO), स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं को भी इस अभियान से जोड़ा जाए। केंद्र सरकार के मंत्रियों, भाजपा सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों को कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा युवा संगठनों के बीच जाकर संवाद कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।
विकसित भारत 2047 में युवाओं की अहम भूमिका
प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि जेन-ज़ी केवल देश का भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान भारत की भी एक महत्वपूर्ण शक्ति है। उनकी तकनीकी समझ, रचनात्मकता, ऊर्जा और नवाचार की क्षमता का सकारात्मक उपयोग देश के विकास को नई गति दे सकता है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का संकल्प तभी साकार होगा, जब युवा पीढ़ी को राष्ट्र की विकास यात्रा में वास्तविक भागीदार बनाया जाएगा। युवाओं को सुनना, उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें नीतिगत एवं सामाजिक निर्णयों में उचित स्थान देना सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की आधारशिला साबित होगा।
प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि सरकार, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिसमें जेन-ज़ी अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और विचारों के माध्यम से देश के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सके।
