हार्ट अटैक से जूझ रहे वरिष्ठ नागरिक को अस्पताल से जबरन किया गया डिस्चार्ज
केपी मेडिकल इंस्टिट्यूट व डॉक्टर पर गंभीर आरोप, मान्यता रद्द करने की मांग
आगरा। भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार जहां आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर और निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही हैं, वहीं कुछ निजी अस्पताल इन सरकारी योजनाओं की मंशा को पलीता लगाते नजर आ रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला आगरा के केपी मेडिकल इंस्टिट्यूट से सामने आया है, जहां हार्ट अटैक से जूझ रहे एक वरिष्ठ नागरिक को कथित तौर पर आयुष्मान भारत योजना के तहत कैशलेस उपचार देने से इनकार करते हुए जबरन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
पीड़ित परिजन शिव प्रकाश यादव, सेवानिवृत्त वरिष्ठ जिला अधीक्षक, ने बताया कि उनके ससुर श्री सुरेंद्र सिंह यादव (सीनियर सिटीजन) को हार्ट अटैक के बाद गंभीर अवस्था में केपी मेडिकल इंस्टिट्यूट में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान मरीज की हालत में सुधार भी हो रहा था, लेकिन इसी बीच अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर हिमांशु यादव द्वारा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैशलेस इलाज देने से मना कर दिया गया। आरोप है कि इसके बाद मरीज को जबरन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, जबकि उसकी हालत अभी भी नाजुक थी।
परिजनों का कहना है कि पीएम-जेएवाई (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) के नियमों के तहत किसी भी संबद्ध अस्पताल को हार्ट अटैक जैसे आपातकालीन मामलों में इलाज से इनकार करने का अधिकार नहीं है। इस तरह का कदम न केवल आयुष्मान भारत योजना की गाइडलाइंस का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय कानून के अंतर्गत आपात चिकित्सा सेवा से इनकार, चिकित्सकीय अनैतिकता और एक वरिष्ठ नागरिक की जान को खतरे में डालने जैसा गंभीर अपराध भी है।
पीड़ित परिवार ने इस मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (भारत सरकार), मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से पत्र व ई-मेल के माध्यम से की है। साथ ही उन्होंने केपी मेडिकल इंस्टिट्यूट और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक व दंडात्मक कार्रवाई करने तथा अस्पताल और डॉक्टर की मान्यता रद्द करने की मांग की है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि इस तरह के मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी जरूरतमंद और गंभीर मरीज अस्पतालों की मनमानी का शिकार होते रहेंगे।

