पर्यावरण इंजीनियर ने बताया — सभी आग लगे स्थानों पर एफआईआर दर्ज और नुकसान की भरपाई की गई, पिछले साल के मुकाबले मामलो में कमी
चंडीगढ़।पंजाब में 15 सितंबर से 27 सितंबर के बीच पराली जलाने के 45 मामले सामने आए, जिनमें से 22 जगहों पर आग लगी। पर्यावरण इंजीनियर सुखदेव सिंह ने बताया कि इन 22 स्थानों पर पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया और नुकसान की भरपाई भी की गई। इसके साथ ही संबंधित एफआईआर दर्ज कर रेड एंट्रीज़ तैयार की गई हैं।
सुखदेव सिंह ने एएनआई को बताया कि उपग्रह सर्वेक्षण के माध्यम से इन घटनाओं की पुष्टि की गई। उन्होंने कहा, “पिछले साल इसी अवधि में 59 मामले सामने आए थे, लेकिन इस साल मामलो की संख्या कम है। इसका कारण यह है कि इस बार फसल कटाई जल्दी हुई और मौसम पूरी तरह सूखा रहा।”
पंजाब और उत्तरी राज्यों में पराली जलाना पर्यावरणीय चिंता का प्रमुख कारण है, क्योंकि इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और सर्दियों में धुआँ और कोहरे के मिलन से स्मॉग बनता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
सरकार ने किसानों को जागरूक करते हुए फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जैव अपघटक और मशीनी उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।
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