लखनऊ। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में आयोजित छात्र-युवा प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग की घटनाओं पर प्रसिद्ध शिया इस्लामिक विद्वान एवं सामाजिक चिंतक मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और विरोध प्रदर्शनों पर अत्यधिक बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

मौलाना ज़ैदी ने कहा कि देश का छात्र अपने भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष अवसरों और जवाबदेही की मांग कर रहा है। ऐसे समय में सरकार का दायित्व छात्रों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान करना है, न कि विरोध कर रहे युवाओं के प्रति कठोर रवैया अपनाना।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में व्यापक असंतोष दिखाई दे रहा है तो केंद्र सरकार को इस विषय पर गंभीर आत्ममंथन करना चाहिए। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति संवाद, संवैधानिक मूल्यों और जनता के विश्वास में निहित है।
मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों और छात्रों के बढ़ते असंतोष की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही केवल प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि नैतिक भी होती है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि छात्रों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाए, पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा भविष्य में किसी भी शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन के दौरान अनावश्यक बल प्रयोग न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
मौलाना ज़ैदी ने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है। यदि छात्रों की आवाज़ को सम्मानपूर्वक सुना जाएगा तो लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा, जबकि असहमति को बलपूर्वक दबाने के प्रयास लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि “लोकतंत्र में सत्ता की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है। सरकार को चाहिए कि वह छात्रों की आवाज़ सुने, संवाद का रास्ता अपनाए और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों के लिए ठोस एवं पारदर्शी कदम उठाए। यही संविधान की भावना और राष्ट्रहित के अनुरूप है।”

